स्त्री और प्रकृति स्त्री एवं प्रकृति, प्रकृति एवं स्त्री, वास्तव में दोनों एक ही है, परंतु भाव एवं रूप अनेक हैं, स्त्री है मानव के अत्यंत निकट, बोलती और सुनती हुई प्रकृति और प्रकृति है मानव का पालन-पोषण करती हुई मूक स्त्री, समाज में स्त्री जितनी स्वतंत्र होगी और शक्तिशाली होगी, प्रकृति उतनी पुष्पित और […]
साहित्य
कविता : सतरंगी सपने… (नागेंद्र सिंह चौहान)
सम्मानित दोस्तों, पढ़िए, मेरी एक और ताजातरीन रचना… यह कविता देश के उन सभी बच्चों को समर्पित है जो हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण हुए हैं या फिर जो बच्चे अभी इंटर कॉलेज में अध्ययनरत हैं. सतरंगी सपने ——————- सतरंगी सपने देखे जो हमने, बड़े खूबसूरत सपने देखे हमने। पहले तो देखा बन्द आंखों से, […]









