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कविता : स्त्री और प्रकृति (आशीष दीक्षित)

स्त्री और प्रकृति स्त्री एवं प्रकृति, प्रकृति एवं स्त्री, वास्तव में दोनों एक ही है, परंतु भाव एवं रूप अनेक हैं, स्त्री है मानव के अत्यंत निकट, बोलती और सुनती हुई प्रकृति और प्रकृति है मानव का पालन-पोषण करती हुई मूक स्त्री, समाज में स्त्री जितनी स्वतंत्र होगी और शक्तिशाली होगी, प्रकृति उतनी पुष्पित और […]

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कविता : औरत… (राजदा खातून)

महिला दिवस की शुभकामनाएं… औरत… औरत वह है जो खुद तो दर्द सहती है, लेकिन दूसरों को अपनी खुशी ही बताती है। औरत वह समुद्र है, जिसके प्यार को कोई पूरी तरह समझ न सका। वह दर्द सहती है, मार भी खाती है, ताने भी सहती है, लेकिन फिर भी खड़ी रहती है, अपने परिवार […]

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कविता : स्त्रीत्व व सृजन (आशीष दीक्षित)

स्त्रीत्व व सृजन स्त्रीत्व है सम्पूर्ण स्वयं में है परिपूर्ण उसे नहीं किसी की चाह उसे नहीं किसी की परवाह परन्तु सृजन उसके प्राणों में है किन्तु सृजन उसकी श्वासों में है और सृजन क्षमता का दुरुपयोग ही उसे बना देता है अत्यन्त दीन कर देता है उसके जीवन को रस विहीन सृजन ऊर्जा का […]

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कविता : मुक्तिमार्ग (आशीष दीक्षित)

मुक्तिमार्ग ओ जीवन के कर्णधार माना कि तुम हो निर्विकार, और ये भी कि तुम हो निराकार परन्तु मेरे तीक्ष्ण समर्पण का भाव, और इसमें मिश्रित आनुपातिक विकार कर ही लेगा तुमको साकार ताकि तुम्हारे उज्ज्वल प्राकट्य को जी-भर देख सके यह संसार जो कहता फिरता है चहुंओर अभी कि अभिकल्पना तुम्हारी है केवल असार […]

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कविता : ये ओहदेदार… (नागेंद्र सिंह चौहान)

ये ओहदेदार •••••••••••••••••• ये जो कुछ ओहदेदार हैं न हमको आदि इत्यादि समझने लगे हैं। जाने कैसे भूल गए ये लोग कल आदि थे कल फिर इत्यादि होंगे। नशा कुर्सी में है शायद देखो, वो एकदम मदांध हो गए हैं। नदारत होंगे उनके सारे चिंटू एक दिन जब ओहदेदार ही न रहेंगे। हम कोई गर्म […]

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कविता : आज यूं ही मन उदास है… (संध्या सिंह)

आज यूँ ही मन उदास है हालांकि सारे अपने भी पास हैं रात थोड़ा और गहराई हर तरफ खामोशी सी छाई नींद ने फिर हमसे किनारा कर लिया आँख बंद कर ख्याल तुम्हारा कर लिया साँसों की लय थोड़ा धीमी है मुस्कान भी आज कुछ भीनी है आखों का दर्द छलक के बह गया फिर […]

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Dhanteras 2025: सावधान! इस बार धनतेरस पर शनिवार का संयोग, भूलकर भी न खरीदें ये 6 चीजें

Dhanteras 2025 on a Saturday: दिवाली के त्योहार की शुरुआत धनतेरस से होती है. इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है. यह त्योहार धन, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है. इस साल धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाया जाएगा.धनतेरस पर नई चीजें खरीदने की परंपरा है, माना जाता है कि इस […]

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कविता : सतरंगी सपने… (नागेंद्र सिंह चौहान)

सम्मानित दोस्तों, पढ़िए, मेरी एक और ताजातरीन रचना… यह कविता देश के उन सभी बच्चों को समर्पित है जो हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण हुए हैं या फिर जो बच्चे अभी इंटर कॉलेज में अध्ययनरत हैं. सतरंगी सपने ——————- सतरंगी सपने देखे जो हमने, बड़े खूबसूरत सपने देखे हमने। पहले तो देखा बन्द आंखों से, […]

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(कविता) बात बस इतनी है… (नागेंद्र सिंह चौहान)

बात बस इतनी है… पता है मुझे बड़े अच्छे से कि मैं बड़ा अच्छा हूँ सच्चा हूँ थोड़ा बच्चा हूँ और यार तुम भी बड़े अच्छे हो। कितने खूबसूरत थे वो दिन कोई न था मेरे तेरे सिवा तू करता था मेरे लिए दुआ अब हर जगह मेरी बुराई करते हो। खैर छोड़ो अपने मध्य […]