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जयंती विशेष : राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी

हमारे देश के राष्ट्रीय-गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चटोपाध्याय की आज जयंती है। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बंगला के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ उनकी ही रचना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गई थी। आज ही के दिन यानी 27 जून, 1838 को […]

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विश्व पर्यावरण दिवस : प्रकृति की सुरक्षा का करें संकल्प ( रमेश सर्राफ धमोरा)

विश्व पर्यावरण दिवस एक अभियान है। इस अभियान की शुरुआत करने का मुख्य उद्देश्य वातावरण की स्थितियों पर ध्यान केन्द्रित करने और पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव का भाग बनने के लिए लोगों को प्रेरित करना है। दुनिया में हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस […]

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जयंती विशेष : देशप्रेम, संघर्ष और बलिदान के प्रतीक अद्वितीय वीर महाराणा प्रताप (अशोक ‘प्रवृद्ध’)

भारतीय इतिहास में राजपूताने का प्रारम्भ से ही गौरवपूर्ण स्थान रहा है और इस राज्य के इतिहास में वीरता, त्याग, बलिदान तथा स्वतन्त्रता प्रेम का एक अद्भुत समन्वय दिखायी देता है। मध्यकाल में यहां के शासकों तथा जनता के द्वारा अपनी स्वाधीनता की रक्षा के लिए मुसलमान सुल्तानों के विरुद्ध किये गये संघर्ष इतिहास में […]

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विशेष : ‘मदर्स डे’ के इतिहास के बारे में कितना जानते हैं आप

बच्चों से लेकर बड़ों की जिंदगी में मां सबसे अहम महिला होती हैं। मां अपने बच्चों की बात कहे बिना ही आसानी से समझ जाती हैं। अच्छी परवरिश से लेकर सही मार्गदर्शन के रूप में हर वक्त वो साथ देती हैं। वैसे तो एक मां के लिए सभी दिन बराबर ही होते हैं, लेकिन मदर्स […]

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मई दिवस पर विशेष : मजदूरों का शोषण मानवता का उपहास (अशोक कुमार चौधरी)

अपने मानवोचित अधिकारों की प्राप्ति के लिए श्रमिकों के संघर्ष की कहानी लंबी है। यह कहानी अब भी समाप्त नहीं हुई हैं। कब तक चलेगी, कहना कठिन है। आज का श्रमिक सामान्यत: सात-आठ घंटे काम करता है लेकिन पुराने जमाने में श्रमिक को पंद्रह-बीस घंटे तक काम करना पड़ता था और उसमें भी यदि मालिक […]

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बिहार : RJD की मीटिंग से गायब रहे कई बड़े नेता

डेस्क : राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को पटना में बुलाई गई थी। पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में सभी मौजूदा और पूर्व एमएलए–एमएलसी और उम्मीदवारों को शामिल होना था, लेकिन पार्टी के कई प्रमुख नेता इस बैठक से गायब रहे। आरजेडी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अवध बिहारी […]

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पृथ्वी दिवस : जीना है तो धरती की भी सुनें (गिरीश्वर मिश्र)

मनुष्य की स्थिति शेष प्रकृति के अवयवों के एक सहचर के रूप में थी । मनुष्य को प्रकृति के रहस्यों ने बड़ा आकृष्ट किया और अग्नि, वायु, पृथ्वी, शब्द आदि सब में देवत्व की प्रतिष्ठा होने लगी और वे पूज्य और पवित्र माने गए । प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते हुए […]

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‘विश्व जल दिवस’ पर विशेष : ‘जल’ है तो ही ‘कल’ है

22 मार्च को प्रतिवर्ष विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जल के महत्त्व पर प्रकाश डालना है। आज विश्व में जल का संकट कोने-कोने में व्याप्त है। लगभग हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। दुनिया औद्योगीकरण की राह पर चल रही है, किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल […]

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‘विश्व गौरैया दिवस’ पर विशेष : नन्ही-सी चिड़िया फिर अंगना में आजा रे…

कुछ साल पहले तक शहरों और गांवों में गौरैया पक्षी की चहचहाहट अकसर सुनाई दे जाया करती थी और यह घर, आंगन, बगीचे या छत पर अक्सर देखने को भी मिल जाया करती थी। परंतु आज यह पक्षी ढूंढने से भी नहीं मिलता आंकड़ों की मानें तो गोरैया नामक चिड़िया की प्रजाति में 60 फ़ीसद से ज्यादा […]

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महिला दिवस पर विशेष : भारतीय संस्कृति में नारी का योगदान

नारी शब्द ही शक्तिस्वरूप है इसके अन्य पर्यायवाची स्त्री भामिनी कांता महिला आदि हैं। नारी के लिए सबसे अधिक प्रयोग में आने वाले शब्द स्त्री व महिला हैं। स्त्री शब्द स्त्यै धातु से बना है जिसका अर्थ है सिकुड़ना इकट्ठा करना सहेजना बनाना समेटना, वास्तव में यह सब स्त्री के स्वभाव में होते हैं। महिला […]