मुंबई: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में रहने वाले लोगों को मराठी सीखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महाराष्ट्र दिवस के मौके पर हुतात्मा चौक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि अपनी मातृभाषा पर गर्व करना जरूरी है, लेकिन इसे थोपने के लिए डर या हिंसा का सहारा लेना गलत है। उन्होंने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य लोगों को भाषा सीखने के लिए प्रेरित करना है, न कि मजबूर करना।
दरअसल, हाल ही में राज्य सरकार द्वारा ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी बोलना या सीखना अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद विवाद बढ़ गया था। इस फैसले के विरोध में रिक्शा यूनियनों ने आवाज उठाई, जिसके बाद सरकार को नियमों के पालन की समय-सीमा बढ़ानी पड़ी।
इस मुद्दे पर राज ठाकरे ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कोई मराठी बोलने से इनकार कैसे कर सकता है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के परमिट रद्द कर दिए जाएं।
राज ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की पहचान हमेशा से उदार और समावेशी रही है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की संस्कृति किसी भी तरह के बहिष्कार या संकीर्ण सोच का समर्थन नहीं करती।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मराठी एक सरल और सुंदर भाषा है, जिसे सहज तरीके से सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोगों को भाषा सीखने में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान के बाद राज्य में भाषा और राजनीति को लेकर चल रही बहस और तेज होने की संभावना है।
आशुतोष झा

