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सेना की धर्मनिरपेक्षता पर शशि थरूर का बयान, पूर्व कमांडर की कहानी से दिया संदेश

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने भारतीय सेना की धर्मनिरपेक्ष परंपरा को रेखांकित करते हुए एक पूर्व सैन्य अधिकारी की दिलचस्प कहानी साझा की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है।

थरूर ने अपने पोस्ट में एरिक अलेक्जेंडर वास का जिक्र किया, जो भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि वास की पुस्तक Fools and Infantrymen में एक ऐसा प्रसंग है, जो सेना की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष सोच को बेहद सरल और प्रभावी तरीके से सामने लाता है।

थरूर के अनुसार, एक उत्तर-पूर्वी राज्य के दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वागत भाषण में यह कहा कि लोगों को अब सुरक्षित महसूस करना चाहिए क्योंकि नए सेना कमांडर ईसाई हैं। इस पर जनरल वास ने बेहद संतुलित और सटीक जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि उनके पूर्ववर्ती एक यहूदी थे और उन्होंने राज्य के लिए उत्कृष्ट कार्य किया था। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना के अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन सरकार के निर्देशों के अनुसार करते हैं, न कि किसी धर्म, भाषा या जाति के आधार पर।

जनरल वास का जवाब यहीं नहीं रुका। उन्होंने अपनी पहचान को लेकर एक अनोखी बात कही—उन्होंने कहा कि वे जन्म से इंसान हैं, परंपरा से हिंदू, शिक्षा से कैथोलिक, स्वभाव से मुसलमान, नैतिक रूप से बौद्ध और कभी-कभी सिख बनने की इच्छा रखते हैं। उनके इस बयान को थरूर ने भारतीय सेना की सच्ची धर्मनिरपेक्षता का उदाहरण बताया।

इस पोस्ट के जरिए शशि थरूर ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारतीय सेना में धर्म या पहचान नहीं, बल्कि कर्तव्य और देश सेवा सर्वोपरि होती है। यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे सेना की एकता और विविधता का प्रतीक मान रहे हैं।

आशुतोष झा

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