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उद्योगपति मगनभाई पटेल की अध्यक्षता में ऐतिहासिक आयोजन, 51 Tribal बेटियों का घर बसाया गया

डेस्क:हाल ही में गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर तालुका के पिपरोल गांव के दूरदराज इलाके में स्वामीनारायण ज्ञानपीठ,सलवाव,वापी द्वारा 17वें सामूहिक विवाह और 91वें हनुमानजी मंदिर मूर्ति प्रतिष्ठा का एक बड़ा उत्सव आयोजित किया गया था। इस उत्सव की अध्यक्षता गुजरात के जाने-माने उद्योगपति एव शाम सेवा फाउंडेशन के चेयरमैन मगनभाई पटेलने की थी, जिसमें वे मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे और उन्होंने 51 आदिवासी लड़कियों को उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया। इस उत्सव में बड़ी संख्या में स्वामीनारायण संप्रदाय के संत,डोनर्स,सामाजिक नेता बड़ी मात्रा में मौजूद थे।इस अवसर पर 91वें हनुमानजी मंदिर में स्वामीनारायण ज्ञानपीठ,सलवाव के पुराणी स्वामी केशवचरणदासजी, ज्ञानपीठ के मैनेजिंग ट्रस्टी कपिलदासजी स्वामी और मगनभाई पटेलने वैदिक मंत्रों के साथ शाश्त्रोक्त विधि विधान अनुसार मंदिर के शिखर कलश की पूजा की। यहां बताना जरूरी है इस सामूहिक विवाह के ७ दिन पूर्व दिनांक : 15.2.26 को इसी संस्था द्वारा ब्लाइंड बेटियों की एक क्रिकेट टूर्नामेंट भी ऑर्गनाइज की गयी थी, जिसमे भी मगनभाई पटेल अध्यक्ष स्थान पर थे और उन्होंने इस क्रिकेट प्रतियोगिता में 2 लाख रुपये का डोनेशन का चेक इस संस्था को दिया। इसी तरह दिनांक : 22.2.26 को यानी सामूहिक विवाह समारोह से एक दिन पहले ही मगनभाई पटेल वापी आ गए और दूसरे दिन अगली सुबह, वे वापी से लगभग 51 km दूर पिपरोड गांव में सामूहिक विवाह समारोह में मुख्य दानदाता के तौर पर मौजूद रहे और अपने भाषण के दौरान 4,51,000 रुपये के दान की घोषणा की। इस तरह, वे हर महीने हो रहे विविध संस्थाओ के सेवा प्रोजेक्ट्स में वे अध्यक्ष एव मुख्यदानदाता के तौर पर मौजूद रहते हैं और संगठन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दान देते रहते हैं और ऐसी संस्थाओ को दूसरे दानदाताओं से डोनेशन दिलाने में मदद करते है।

यहां बताना जरूरी है कि वर्ष 1967 से मगनभाई पटेल का एजुकेशनल,इंडस्ट्रियल, सोशल और इकोनॉमिक सेक्टरमे महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। एक सफल उद्योगपति होने के बावजूद,वे समाज के गरीब,श्रमजीवी,आदिवासी कम्युनिटी,महिलाए,बच्चे,बुजुर्ग, मनोदिव्यांग एव नेत्रहीन लोगो के लिए आज 84 साल की उम्र में भी वे एक फरिश्ता बनकर काम कर रहे हैं। उन्होंने अब तक हजारों लोगों को नौकरी दिलाने के साथ-साथ माइक्रो एव कॉटेज इंडस्ट्री भी बनाई हैं और कई महिलाओं को रोजगारी दिलाने में मदद की है। उन्होंने अपने फंड से गुजरात राज्य के स्लम एरिया में रहनेवाली गरीब परिवारों की कई महिलाओं को सिलाई मशीनें दी हैं और इन महिलाओं के बच्चों की स्कूल फीस, स्कुलबेग,स्टेशनरी इत्यादि देकर “विद्या दान-महा दान” सूत्र को सच्चे अर्थ में चरितार्थ किया है और इसी वजह से आज समाज के धार्मिक, सामाजिक और पॉलिटिकल सेक्टर के लोग बड़े-बड़े प्रोग्रामो में उन्हें “भामाशाह”,”भीष्म पितामह”,”दानवीर कर्ण” जैसे शब्दों से सन्मानित करते है।

मगनभाई पटेल अपने फंड से देश के अलग-अलग सभी धार्मिक पंथ एव संप्रदायों के सभी प्रोग्राम की अध्यक्षता करते हैं और मुख्य दानदाता के तौर पर मौजूद रहकर संगठनों के सेवाकार्यो को प्रोत्साहित करते रहते हैं। मगनभाई पटेल केंद्र एव राज्य सरकार की विभिन्न समितियाँ में ऊंचे पदों पर रहकर देश के विकास के लिए कई जरूरी सुझाव दिए हैं, जिन्हें केंद्र एव राज्य सरकारने उसका अमलीकरण भी किया है, जिसके अनगिनत उदाहरण हैं, जिनका विस्तृत में ब्यौरा किया जाये तो एक किताब बन सकती है।

इस सामूहिक विवाह समारोह के अध्यक्ष और मुख्य दानदाता मगनभाई पटेलने अपने उदबोधन में कहा कि आज 17वें सामूहिक विवाह और 91वें हनुमानजी मंदिर की स्थापना के अवसर पर मैं स्वामीनारायण ज्ञानपीठ के पुराणी स्वामी केशवचरणदासजी, संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी स्वामी कपिलदासजी,सभी संत-महात्मा,दानदाताए, संस्था के एडमिन हेड डॉ. हितेनभाई उपाध्याय,गणमान्य अतिथि एव सामाजिक कार्यकर्ताओ को इस अवसर पर बधाई देता हूं और 51 आदिवासी बेटियों को उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

मौजूद आदिवासी जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मगनभाई पटेलने कहा कि आज जब 91 में हनुमानजी मंदिर की स्थापना हुई है, तो मैं इतना ही कहूंगा कि हनुमानजी सेवा, समर्पण और शक्ति के प्रतीक हैं। जैसे भगवान शंकर की पूजा से पहले गणेशजी की पूजा की जाती है, वैसे ही भगवान राम की पूजा से पहले हनुमानजी की पूजा की जाती है। किसी दूसरे धर्म की ओर आकर्षित हुए बिना सनातन हिंदू धर्म के प्रतीक हनुमानजी के प्रति समर्पण करने से जीवन की सभी मुश्किलों से लड़ने की ताकत मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि देश के आदिवासी इलाकों के ज्यादातर लोग नशा एव अंधश्रद्धा के आदी होते हैं, इसलिए ऐसे इलाकों में मंदिरों की जरूरत है ताकि वहा सुबह-शाम आरती एव पूजापाठ होने से ईश्वर के प्रति उनकी श्रद्धा बनी रहे, धार्मिक आस्था से जुड़े रहे,अंधश्रद्धा से दूर रहे और छोटे-बड़े अपराध करने से हिचकिचाएं साथ ही साथ किसी अन्य धर्म के लोग इन आदिवासी लोगो की मजबूरी का फायदा न उठा सके और यह लोग धर्म परिवर्तन से बचे रहे।

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