भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में पूजनीय और सम्माननीय माना गया है : प्रो. (डॉ.) एमए हाशमी
महिला दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समान अवसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का दिन है : डॉ. एमआई हक
शिक्षा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाती है : डॉ. कल्याणी कुमारी
महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं : प्रो. अबसारुल हक

लहेरियासराय, दरभंगा । ज़ाकिर हुसैन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, लहेरियासराय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका पर विचार व्यक्त किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) एमए हाशमी, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में पूजनीय और सम्माननीय माना गया है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास और प्रगति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

एकेडमिक इंचार्ज डॉ. एमआई हक ने कहा कि महिला दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समान अवसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का दिन है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने की प्रेरणा दी।
डॉ. कल्याणी कुमारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रशासनिक पदाधिकारी प्रो. अबसारुल हक ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्राओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर डॉ. कुमारी सरिता, डॉ. सबीहा परवीन, राहत जहाँ, मनीषा हेरा, डॉ. मुसर्रत फैजी़, डॉ. पूजा शर्मा तथा अजरा सदफ सहित कॉलेज के अन्य शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन निष्ठा वत्स और शालिनी कुमारी ने किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
