नई दिल्ली: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को हुई INDIA गठबंधन की अहम बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाने की कोशिश जरूर की, लेकिन अंदरूनी मतभेद भी साफ नजर आए। बंगाल में करारी हार और TMC में बढ़ती बगावत के बीच ममता बनर्जी का बदला हुआ राजनीतिक अंदाज चर्चा का केंद्र बन गया।
बैठक में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी राजनीति में बदलते समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं। कभी कांग्रेस पर आक्रामक रहने वाली ममता अब INDIA गठबंधन में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही हैं।
इस बैठक में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का बढ़ता प्रभाव भी साफ दिखाई दिया। मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन के दौरान सबसे पहले अखिलेश यादव को बोलने का मौका दिया, जिसे विपक्षी राजनीति में उनके बढ़ते महत्व के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश और 2029 की रणनीति में सपा की भूमिका अब पहले से ज्यादा अहम मानी जा रही है।
हालांकि विपक्षी एकता की तस्वीर के पीछे कई दरारें भी नजर आईं। DMK और आम आदमी पार्टी जैसी प्रमुख पार्टियां बैठक से दूर रहीं। वहीं, TMC के भीतर टूट और सांसदों की नाराजगी ने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बैठक के बाद विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर साझा लड़ाई का ऐलान किया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि क्या INDIA गठबंधन वास्तव में मजबूत हो रहा है या फिर यह सिर्फ चुनावी मजबूरी की तस्वीर है।
आशुतोष झा

