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मिथिला के हर घरों के लिए पूज्य है बाबा विद्यापति,देश स्तर पर मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को किया स्थापित : डा गोपाल जी ठाकुर

दरभंगा। कवि कोकिल बाबा विद्यापति ने न केवल अपनी रचनाओं से मिथिला क्षेत्र का सम्मान बढ़ाया है बल्कि उनकी सोच, उनके व्यक्तित्व के कारण विश्व के मानस पटल पर मिथिला की बौद्धिक क्षमता की एक नई मिशाल पेश की। आज जरूरत इस बात की है मिथिला क्षेत्र में यहां के छात्र छात्राओं को विद्यापति की रचनाओं को अपने अध्ययन में निश्चित रूप से शामिल करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने लहेरियासराय के बलभद्रपुर स्थित दरभंगा लोकसभा के संसदीय कार्यालय कक्ष में वहा उपस्थित मिथिला मैथिली से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों के बीच मिथिला क्षेत्र के अमर रचनाकार और उगना के रूप में भगवान शिव की सेवा करने वाले बाबा विद्यापति के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उपरोक्त बातें कही। लोकसभा संसदीय कार्यालय पर मैथिल समाज रहिका,विद्यापति विकास समिति शाहपुर के प्रतिनिधियों द्वारा विद्यापति समारोह के लिए आमंत्रण देने आए मिथिला मैथिली के सेवकों के बीच कवि कोकिल बाबा विद्यापति को भारतीय साहित्य, संस्कृति का सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक पहचान बताते हुए कहा विद्यापति सगुण भक्तिमार्ग मार्ग के जिस परंपरा को स्थापित किया उसी की देन है कि देश ही नही वैश्विक स्तर पर मिथिला के ज्ञान कला को एक नई पहचान मिली।

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