डेस्क: बंबई हाई कोर्ट (Bombay High Court) में लिपिक पद (Clerk Post) पर भर्ती के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग टेस्ट को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायतों ने विवाद खड़ा कर दिया है। परीक्षा में शामिल कई उम्मीदवारों ने तकनीकी (Technical) और सर्वर (Server) संबंधी समस्याओं का आरोप लगाते हुए छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) भी अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन किया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के दौरान कई कंप्यूटरों ने ठीक से काम नहीं किया। कुछ उम्मीदवारों ने दावा किया कि उनकी कंप्यूटर स्क्रीन अचानक पीली दिखाई देने लगी, जबकि कुछ स्थानों पर कीबोर्ड ने काम करना बंद कर दिया। उम्मीदवारों के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा देना मुश्किल हो गया और उन्हें इस बात की चिंता है कि तकनीकी खामी के कारण उनका परिणाम प्रभावित हो सकता है।
कथित तकनीकी व्यवधान सुबह 10 बजे से 11:15 बजे के बीच आयोजित सत्र के दौरान सामने आया। प्रभावित अभ्यर्थियों ने परीक्षा दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कंप्यूटर या सर्वर से जुड़ी समस्या के कारण परीक्षा प्रभावित हुई है तो इसके लिए उम्मीदवारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने भी प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों को सुना। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों को उनकी किसी गलती के बिना ही असफल घोषित कर दिया गया। दीपके ने कहा कि जब तक उम्मीदवारों की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह उनके साथ खड़े रहेंगे।
दीपके कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद छत्रपति संभाजीनगर के सुराणा नगर इलाके में स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। वहां उन्होंने प्रभावित उम्मीदवारों से बातचीत की। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों की तकनीकी समस्याओं को उचित तरीके से नहीं सुना गया और कुछ अभ्यर्थियों से यह कहा गया कि वे परीक्षा देना नहीं जानते।
मामले में हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि लिपिक पद के लिए टाइपिंग परीक्षा एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गई थी। परीक्षा प्रक्रिया को सामान्य रूप से संचालित किए जाने की बात कही गई, लेकिन कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याएं सामने आने की भी जानकारी दी गई है।
रजिस्ट्रार के संदेश के मुताबिक, विशेष रूप से औरंगाबाद और कल्याण केंद्रों पर तकनीकी दिक्कतों की बात सामने आई है। एजेंसी के माध्यम से आयोजित प्रक्रिया में यदि कोई तकनीकी समस्या हुई है तो उसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में अभ्यर्थियों को आधिकारिक रूप से जानकारी देने की बात कही गई है।
इस भर्ती परीक्षा में पूरे महाराष्ट्र से लगभग 13 हजार उम्मीदवार पात्र थे। हाई कोर्ट की नागपुर और औरंगाबाद पीठ के तहत 1,300 लिपिक पदों के लिए परीक्षा तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। छत्रपति संभाजीनगर के विभिन्न केंद्रों पर मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया।
अभ्यर्थियों का मुख्य जोर परीक्षा प्रक्रिया में समान अवसर और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर है। उनका कहना है कि तकनीकी खराबी से प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए। फिलहाल मामले में जांच जारी है और अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अब उम्मीदवारों की नजर जांच के निष्कर्ष और दोबारा परीक्षा कराने को लेकर होने वाली आधिकारिक कार्रवाई पर है।

