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भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे को मानते हैं बड़ा खतरा, बांग्लादेश की पाकिस्तान पर राय भारत के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक

डेस्क: दक्षिण एशिया (South Asia) के देशों के बीच भारत की छवि (Image) और क्षेत्रीय संबंधों को लेकर किए गए एक हालिया सर्वेक्षण (Survey) में अलग-अलग देशों की राय में बड़ा अंतर सामने आया है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के वयस्कों से किए गए सवालों में भारत को लेकर श्रीलंका (Sri Lanka) में सबसे सकारात्मक रुख दिखाई दिया। वहीं पाकिस्तान (Pakistan) में भारत के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या काफी कम रही।
सर्वेक्षण के अनुसार श्रीलंका में 79 प्रतिशत वयस्कों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। यह चारों दक्षिण एशियाई देशों में भारत के लिए सबसे मजबूत समर्थन है। इसके मुकाबले बांग्लादेश में 42 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया, जबकि पाकिस्तान में यह आंकड़ा केवल सात प्रतिशत रहा। आंकड़े दोनों देशों के बीच भारत को लेकर मौजूद अलग-अलग धारणाओं को सामने रखते हैं।
सर्वेक्षण में भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी धारणा को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। दोनों देशों के बड़ी संख्या में लोगों ने एक-दूसरे को अपने लिए प्रमुख खतरे के तौर पर देखा। इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों का असर जनमत पर भी दिखाई देता है।

बांग्लादेश को लेकर भारतीयों की राय भी सर्वेक्षण में सामने आई। केवल 25 प्रतिशत भारतीयों ने बांग्लादेश के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में दोनों देशों में एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक धारणा में गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में 57 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई थी, जबकि भारत में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत था।
श्रीलंका का रुख इस क्षेत्र के अन्य देशों से अलग दिखाई देता है। वहां 79 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। इसके अलावा 63 प्रतिशत श्रीलंकाई नागरिकों ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। इसके विपरीत बांग्लादेश और पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोगों ने भारत को अपने लिए प्रमुख खतरे के तौर पर देखा।
सर्वेक्षण में भारत के प्रमुख सहयोगियों को लेकर भी लोगों की राय पूछी गई। भारत में करीब 36 प्रतिशत लोगों ने रूस को अपना सबसे प्रमुख सहयोगी बताया। इसके मुकाबले 16 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका को प्रमुख सहयोगी माना। लगभग एक-तिहाई भारतीयों ने इस सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे भारत में रूस के प्रति लंबे समय से मौजूद रणनीतिक और कूटनीतिक धारणा का संकेत मिलता है।

अमेरिका में भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर भी लोगों की राय सामने आई। सर्वेक्षण में शामिल 54 प्रतिशत से अधिक अमेरिकियों का मानना था कि हाल के वर्षों में भारत का वैश्विक प्रभाव लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है। वहीं 30 प्रतिशत लोगों ने माना कि भारत का प्रभाव बढ़ रहा है, जबकि 13 प्रतिशत ने इसके कम होने की बात कही।
अमेरिकी राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच भी भारत को लेकर राय में अंतर दिखाई दिया। करीब 50 प्रतिशत डेमोक्रेट और डेमोक्रेट समर्थकों ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख जताया। रिपब्लिकन और रिपब्लिकन समर्थकों में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दक्षिण एशिया में भारत की छवि एक जैसी नहीं है। श्रीलंका में मजबूत सकारात्मक धारणा के विपरीत पाकिस्तान में भारत को लेकर नकारात्मक रुख अधिक दिखाई देता है। बांग्लादेश में भी हाल के वर्षों में सकारात्मक राय में गिरावट दर्ज हुई है। ऐसे में सर्वेक्षण क्षेत्रीय संबंधों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के नागरिकों की बदलती धारणाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।

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