मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद चौंकाने वाली और संवेदनशील सुरक्षा में चूक की खबर सामने आई है। मेरठ के हाई-सिक्योरिटी वाले सैन्य क्षेत्र (कैंट) में लगातार तीन दिनों तक संदिग्ध ड्रोन उड़ते देखे जाने के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, 28 से 30 मई के बीच रात के सन्नाटे में कैंट इलाके के आसमान में एक-एक करके कुल पांच संदिग्ध ड्रोन मंडराते हुए नोटिस किए गए। ड्यूटी पर तैनात मुस्तैद सैन्य जवानों ने न सिर्फ इनकी संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा, बल्कि उनके वीडियो भी रिकॉर्ड किए। सेना के जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इनमें से दो ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि तीन अन्य ड्रोन गायब होने में कामयाब रहे। आइए जानते हैं अधिकारियों ने इस गंभीर मामले पर सुरक्षा के क्या कड़े कदम उठाए हैं-
मलबे की तलाश में जंगलों को खंगाल रही सेना और पुलिस
सैन्य क्षेत्र में ड्रोन दिखने की इस गंभीर घटना के बाद सेना के उच्च अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को मामले की संप्रभुता से अवगत कराया। सूचना मिलते ही पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त टीमों ने पूरे इलाके में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि जिन दो ड्रोन्स को जवानों ने नष्ट किया था, उनके अवशेष और मलबे को ढूंढने के लिए कैंट से सटे जंगलों और रिहायशी इलाकों की खाक छानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ड्रोन का मलबा हाथ लगते ही इसके मेक, मॉडल और इसे भेजने वाले के मंसूबों का सटीक पता लगाया जा सकेगा।
हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से जासूसी का शक
जवानों द्वारा बनाए गए वीडियो की प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई है कि इन ड्रोन्स में बेहद आधुनिक और हाई-रेजोल्यूशन वाले कैमरे लगे हो सकते हैं। प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र के संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें या वीडियो लेना एक बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल इनपुट भेजे गए। इसके बाद एसपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम को सैन्य क्षेत्र के भीतर बारीकी से तफ्तीश के लिए तैनात किया गया है।
CCTV फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस
ड्रोन ऑपरेटर्स यानी इन्हें उड़ाने वाले रिमोट कंट्रोलर्स तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा लगातार बड़ा किया जा रहा है। मिलिट्री बेस से सटे इलाकों जैसे सरधना रोड, कंकरखेड़ा, आरवीसी सेंटर और गंगानगर समेत कई प्रमुख मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इन रूटों और आसपास की इमारतों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि यह सुराग मिल सके कि इन ड्रोन्स को कैंट की सीमा के भीतर किस दिशा से और किसने लॉन्च किया था।
कई थानों में हाई-अलर्ट
सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, सोमवार को भी दिन और रात के समय कुछ और संदिग्ध चीजें आसमान में दिखने की अपुष्ट खबरें आईं, जिसके बाद कैंट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी थानों को ‘हाई-अलर्ट’ मोड पर डाल दिया गया है। सेना ने भी रात के वक्त अपनी पेट्रोलिंग और गश्त को दोगुना कर दिया है।
कड़े कानूनी नियम
रक्षा और पुलिस अधिकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों (No-Fly Zones) में बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी प्रकार का ड्रोन या यूएवी (UAV) उड़ाना एक गंभीर और दंडनीय राष्ट्रीय अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ न सिर्फ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी, बल्कि उन पर ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। फिलहाल, देश की खुफिया एजेंसियां ड्रोन उड़ाने वालों की पहचान और उनके असली मकसद को डिकोड करने में जुटी हैं।

