
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक ऐसी न्यूक्लियर डील को हरी झंडी दे दी है, जिसे आने वाले कई सालों तक मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रणनीतिक साझेदारियों में गिना जा सकता है।
इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा विकसित करने में मदद करेगा। यानी न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने से लेकर तकनीकी सहयोग तक, दोनों देश साथ काम करेंगे।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा एक बात की हो रही है…
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते से भविष्य में सऊदी अरब को अपने देश में यूरेनियम एनरिचमेंट का रास्ता भी मिल सकता है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि अगर ऐसी तकनीक एक और देश के पास पहुंची, तो क्या मध्य पूर्व में न्यूक्लियर प्रतिस्पर्धा और तेज हो जाएगी?
वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस डील से अमेरिका को बड़ा आर्थिक फायदा होगा, अमेरिकी कंपनियों को अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट मिलेंगे और क्षेत्र में चीन और रूस का बढ़ता प्रभाव भी चुनौती के घेरे में आएगा।

