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Buddhism Marriage: बिना फेरे, बिना मुहूर्त-ऐसे होती है बौद्ध धर्म में शादी, एक घंटे में पूरी रस्म

डेस्क:शादी को लेकर हर धर्म की अपनी परंपराएं हैं-कहीं सात फेरे, कहीं निकाह, तो कहीं चर्च या गुरुद्वारे में विवाह (Marriage in Buddhism)। लेकिन बौद्ध धर्म (Marriage in Buddhism) में शादी का तरीका इन सबसे काफी अलग और बेहद सरल होता है। यहां विवाह को धार्मिक संस्कार नहीं, बल्कि एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।

संस्कार नहीं, जिम्मेदारी है विवाह

गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार, विवाह का उद्देश्य जीवन में जिम्मेदारी, प्रेम और आपसी सम्मान को बढ़ाना है। यही वजह है कि बौद्ध विवाह में

न कुंडली मिलान होता है
न शुभ मुहूर्त देखा जाता है
न फेरे या सिंदूर जैसी रस्में होती हैं

कैसे शुरू होती है प्रक्रिया?

बौद्ध समाज में सगाई अनिवार्य नहीं होती। यदि परिवार सहमत हों, तो सीधे शादी की तारीख तय कर ली जाती है।
वर-वधू आमतौर पर सफेद वस्त्र पहनते हैं
किसी विहार, घर या हॉल में समारोह होता है
बौद्ध विहार या मंच पर बुद्ध की प्रतिमा/तस्वीर स्थापित की जाती है .

पूजा और मंत्रोच्चार

विवाह के दौरान सभी लोग बुद्ध की प्रतिमा की ओर मुख करके बैठते हैं और भिक्षु के मार्गदर्शन में मंत्रों का जाप करते हैं, जैसे—
“बुद्धं शरणं गच्छामि…”
धम्म और संघ की वंदना
इसके बाद वर-वधू दीप जलाते हैं, अगरबत्ती लगाते हैं और बुद्ध को पुष्प अर्पित करते हैं।

वचन और जिम्मेदारियां

बौद्ध विवाह में सबसे अहम हिस्सा होता है—वचन (प्रतिज्ञाएं)।
पति पत्नी से प्रेम, सम्मान और सहयोग का वादा करता है
पत्नी घर और संबंधों को निभाने की जिम्मेदारी लेती है
यह प्रक्रिया किसी धार्मिक बंधन से ज्यादा आपसी समझ और कर्तव्य पर आधारित होती है।

सरल रस्में, बिना दिखावे के

कोई अग्नि या सात फेरे नहीं
कई जगह सफेद धागा बांधने या जल अभिषेक की परंपरा
वर-वधू एक-दूसरे को माला पहनाते हैं
भिक्षु “मंगल सुत्त” या “जयमंगल गाथा” का पाठ कर आशीर्वाद देते हैं।

कितने समय में पूरी होती है शादी?

बौद्ध विवाह आमतौर पर 30 मिनट से 1 घंटे के भीतर पूरा हो जाता है। इसके बाद
सबसे पहले भिक्षु-संघ को भोजन कराया जाता है
फिर परिवार और मेहमान भोजन करते हैं .

खर्च और दहेज पर क्या नियम?

बौद्ध परंपरा में
दहेज और दिखावा हतोत्साहित किया जाता है
सादगी और समानता पर जोर दिया जाता है
कुल मिलाकर, बौद्ध धर्म में शादी दिखावे से दूर, सादगी और जिम्मेदारी पर आधारित होती है—जहां रिश्ते की नींव रस्मों से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और समझ से रखी जाती है।

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