राष्ट्रीय

भारत को समझने के लिए संस्कृत का समझना जरूरी: मोहन भागवत

डेस्क: आज RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया. कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख नेताओं और विद्वानों ने शिरकत है, जिन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज ये एक शुभ योग है, अक्षय तृतीया के दिन प्रारंभ होने वाले कार्य हमेशा प्रारंभ रहते हैं. वह अक्षुण्ण रहते हैं. यही बात संस्कृत के बारे में भी कही गई है. कभी न क्षय होने वाला आभूषण संस्कृत है. उसका कार्यालय अपने आप में यह संदेश दे रहा है.

RSS प्रमुख ने कहा कि विज्ञान कहता है कि नाद से सृष्टि उत्पन्न हुई और वही चल रहा है. प्रणव नाम एक संदेश दे रहा है ये एक सत्य संकल्प है. उन्होंने कहा कि कार्यालय का लोकार्पण हुआ है. कार्य का विचार भी स्थिर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज रुचि के हिसाब से कार्य करते हैं लेकिन उस कार्य के प्रयोजन को जानने के बाद उसका पक्का होना सिद्ध होता है.

भागवत ने कहा कि एक ही तरकारी रोज नहीं खा सकते, तड़का बढ़ाना ठीक लगता है. लेकिन एक काम उबाऊ नहीं लगता. जन्म से लेकर लगातार सांस लेना रोज रोज आदमी नहीं छोड़ता न ही वो उबाऊ होता है. उन्होंने कहा कि कार्यालय के उद्घाटन में उसके आनंद उत्साह में कार्य का भाव भी स्थिर होना चाहिए. रुचि के साथ प्रयोजन भी हो तो कार्य अच्छा और निरंतर होता है. उन्होंने कहा कि साधन नहीं अवस्था में कार्य आरम्भ होता है.

उन्होंने आगे कहा कि बाद में कीर्ति, धन साधन भी आते हैं लेकिन कार्य में निष्ठा तब आती है, जब प्रयोजन स्पष्ट हो. उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत का प्राण है. भारत का अस्तित्व केवल भूगोल नहीं, भारत एक परंपरा है. इसके आधार पर जीवन चलता है. उसकी आवश्यकता दुनिया में निरंतर रहती है. उन्होंने कहा कि संस्कृत सबको आनी चाहिए यह संस्कार लाती है.

मोहन भागवत ने कहा कि भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भारत की विभिन्न भाषा है सभी भाषा राष्ट्रीय भाषा है लेकिन उनको आपस में जोड़ने वाली भाषा संस्कृत है. उन्होंने कहा कि संस्कृत जानने वालों को देश भर में कहीं बोलचाल में दिक्कत नहीं होती. उन्होंने कहा कि संस्कृत जानने वाले के बुद्धि का विकास भी बेहतरीन होता है. उन्होंने कहा कि भाषा को सिखाना कार्यक्रम है लेकिन भाव को मन में उतरना प्रयोजन है क्योंकि इसको मन में उतारने से भारत मन में उतरता है.

RSS प्रमुख ने बताया कि संस्कृत को जानने में उन्हें बचपन में दिक्कत आई और वो दिक्कत आज भी है. उन्होंने कहा कि जब वो 5वीं या 6वीं क्लास में थे तो वो ग्रामर पढ़ने के लिए जो श्लोक याद करना था उसको पढ़ने में ही उनकी क्लास चली गई ये इतना कठिन था. उन्होंने कहा कि वो व्याकरण नहीं जानते, भाव जानते हैं. उन्होंने कहा कि संभाषण ही सबसे अच्छा और सरल तरीका है संस्कृत सीखने का.

भागवत ने कहा कि देश में संस्कृत के प्रति रुचि पिछले 15 सालों में बढ़ी है. उन्होंने कहा कि संभाषण शिविरों की संख्या लगातार बढ़े इसकी चिंता संस्कृत भारती को करना है. उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा आम आदमी सीखे उसमें भाषा की कोई कमी नहीं है, उसको आम जन तक लेकर जाने वालों की कमी है. उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा लेकर नहीं चलती बल्कि एक संस्कृति और संस्कार लेकर चलती है, इसलिए इस प्रयोजन को आगे लेकर चलना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *