पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राज्य की सत्ता की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथों में आ गई है। नई सरकार के गठन के साथ ही जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने भी शपथ लेकर सत्ता में अहम भूमिका हासिल कर ली है। उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे उनके राजनीतिक कद का अंदाजा लगाया जा सकता है।
समस्तीपुर में जन्मे विजय कुमार चौधरी का सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर बिहार की राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा है। 8 जनवरी 1957 को जन्मे चौधरी ने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर किया। पढ़ाई के बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में अधिकारी के तौर पर नौकरी शुरू की, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति की राह पर ला खड़ा किया। पिता के निधन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
उनके राजनीतिक करियर की नींव 1985 और 1990 के दौर में पड़ी, जब रोसड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेता रामेश्वर राय बच्चा बाबू का साथ उन्हें मिला। ‘बच्चा बाबू’ के मार्गदर्शन में विजय चौधरी ने जमीनी राजनीति को करीब से समझा और जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई। यही समर्थन उनके राजनीतिक सफर का शुरुआती आधार बना।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से करने वाले विजय चौधरी ने दलसिंहसराय से विधायक बनकर अपनी पहचान बनाई। लगातार तीन बार जीत दर्ज करने के बाद उनका सियासी सफर एक नए मोड़ पर तब पहुंचा, जब 2005 में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया। इसके बाद वे तेजी से पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में शामिल हो गए और संगठन से लेकर सरकार तक कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
सरकार में उनकी भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है। वित्त, शिक्षा, जल संसाधन और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ उन्होंने 2015 से 2020 तक बिहार विधानसभा अध्यक्ष के रूप में भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। उनकी कार्यशैली को संतुलित और निर्णयात्मक माना जाता है।
साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले विजय चौधरी पर अब तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। उन्हें लंबे समय से नीतीश कुमार का करीबी और रणनीतिक सलाहकार माना जाता रहा है, जो सरकार के अहम फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
अब जब बिहार की कमान नई नेतृत्व के हाथों में है, तो सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विजय कुमार चौधरी किस तरह सरकार की नीतियों और प्रशासन को दिशा देते हैं।
आशुतोष झा

