डेस्क:राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका (Judiciary) से जुड़े एक अध्याय पर उपजे विवाद के बाद ‘बिना शर्त और बिना किसी योग्यता के’ (Unconditional and Unqualified) माफी मांग ली है। परिषद ने न केवल माफी मांगी है, बल्कि उस पूरी किताब को ही बाजार और डिजिटल प्लेटफॉर्म से वापस ले लिया है। सोशल मीडिया और किताबों पर ‘सर्जिलक स्ट्राइक’
NCERT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए घोषणा की कि विवादित अध्याय (अध्याय IV) के लिए परिषद के निदेशक और सदस्य खेद प्रकट करते हैं। NCERT ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि जिस किसी के पास भी इस प्रतिबंधित किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ की प्रतियां हैं, वे इसे तुरंत परिषद के मुख्यालय में वापस कर दें। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि इस किताब से संबंधित किसी भी सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया से तुरंत हटाया जाए।
आखिर विवाद क्या था?
कक्षा 8 की इस नई किताब के अध्याय ‘समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ (Role of Judiciary in our Society) में कुछ ऐसी टिप्पणियाँ की गई थीं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पाठ्यपुस्तक में भारतीय न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों का जिक्र करते हुए ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ (Judicial Corruption), मामलों का भारी बैकलाग (लंबित मामले) और न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या जैसे गंभीर शब्दों का प्रयोग किया गया था। अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला और “अनुचित सामग्री” माना, जिसके बाद NCERT पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
