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अमेरिका-ईरान संघर्ष से तेल बाजार में उछाल, कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, ईंधन महंगा होने की आशंका

डेस्क: अमेरिका (America), इजरायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिसका असर आने वाले दिनों में आम लोगों की रसोई और ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है।

एक दिन में करीब 17 प्रतिशत की तेजी

सोमवार को अमेरिकी मानक डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 15.66 डॉलर बढ़कर 106.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इस तरह इसमें लगभग 17.23 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ब्रेंट कच्चे तेल का भाव भी 14.23 डॉलर बढ़कर 106.92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पिछले शुक्रवार तक तेल की कीमतें लगभग 90 डॉलर के आसपास स्थिर थीं, लेकिन सप्ताहांत में बिगड़े हालातों ने बाजार का रुख पूरी तरह बदल दिया।

दस दिनों से जारी है संघर्ष

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले लगभग दस दिनों से जारी सैन्य टकराव को मुख्य कारण माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें तेहरान के प्रमुख ईंधन भंडार भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर पलटवार किया है। कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद सैन्य ठिकानों को लेकर आई खबरों ने ऊर्जा बाजार में चिंता और बढ़ा दी है।

ईरान की चेतावनी से बढ़ी चिंता

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि यदि युद्ध इसी तरह जारी रहा तो इसका सीधा असर ईरान के तेल उद्योग पर पड़ सकता है। उनके अनुसार स्थिति ऐसी भी बन सकती है कि ईरान न तो पर्याप्त तेल उत्पादन कर पाए और न ही उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। इस बयान के बाद वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर आशंकाएं और गहरा गई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर

ऊर्जा विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्र का संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल जहाजों के जरिए गुजरता है। फिलहाल यह मार्ग बंद नहीं किया गया है, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो अमेरिका या इजरायल से जुड़े व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। यदि यह रास्ता बाधित हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर अमेरिका में भी चिंता जताई जा रही है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि यह तेजी मुख्य रूप से बाजार की आशंकाओं के कारण है और संभव है कि यह स्थिति लंबे समय तक न रहे। उनके अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी हो सकती है और कुछ सप्ताह में स्थिति सामान्य हो सकती है। वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी कहा कि ईरान के मौजूदा शासन के खिलाफ की जा रही कार्रवाई भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।

ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन इसे वैश्विक सुरक्षा की कीमत बताया। ट्रंप के अनुसार जैसे ही ईरान से जुड़े परमाणु खतरे को समाप्त किया जाएगा, तेल की कीमतें फिर से तेजी से नीचे आ सकती हैं।

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