डेस्क: अमेरिका (America), ईरान (Iran) और इजरायल (Israel) के बीच बढ़ते संघर्ष का असर आज भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) पर भी देखने को मिला। सेंसेक्स में 2366 अंक की गिरावट के साथ यह 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों के भारी नुकसान के बाद 23,732 के स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स के सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7 प्रतिशत से अधिक गिरकर सबसे अधिक नुकसान में रहा। टाटा स्टील में 5.59 प्रतिशत, मारुति में 5.40 प्रतिशत और इटरनल में 5.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
दिनभर का बाजार अपडेट
सुबह 9:20 बजे तक बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 2170 अंक नीचे 76,748 पर था, जबकि एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 672 अंकों की गिरावट के साथ 23,772 पर कारोबार कर रहा था। एनएसई पर केवल 249 शेयर हरे निशान पर थे और 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचे।
सुबह 9:15 बजे सेंसेक्स 1862 अंक गिरकर 77,056 पर खुला, वहीं निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर खुला। सुबह 7:40 बजे निफ्टी 23,824 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 722 अंकों की गिरावट है। यह संकेत देता है कि शेयर बाजार आज ‘ब्लैक मंडे’ जैसा प्रदर्शन कर रहा है।
एशियाई बाजार भी डूबे
मध्य पूर्व में युद्ध के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एशियाई बाजारों में भारी गिरावट ला दी। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22 प्रतिशत गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे आ गया। टॉपिक्स सूचकांक में 5.27 प्रतिशत की गिरावट हुई। कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 8 प्रतिशत से अधिक गिरा और इसमें प्रमुख चिप कंपनियों जैसे सैमसंग और एसके हाइनिक्स ने 8 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान झेला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी भारी गिरावट के संकेत के साथ खुला।
वॉल स्ट्रीट का हाल
शुरुआती कारोबार में डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंकों तक की गिरावट दर्ज हुई। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक नीचे और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट आई।
कच्चे तेल ने तोड़े रिकॉर्ड
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और मध्य पूर्वी तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन कटौती के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 18.03 प्रतिशत बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 20.23 प्रतिशत उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंचा। यह स्तर रूस के यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद सबसे अधिक है। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेताया है कि यदि खाड़ी देशों को युद्ध के कारण उत्पादन रोकना पड़ा तो तेल की कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती हैं।
