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पुतिन का ट्रंप को मुंहतोड़ जवाब, ब्रह्मोस से लेकर सुखोई एसयू-57 तक: भारत-रूस की दोस्ती का नया अध्याय!

डेस्क: भारत अपनी स्वदेशी सैन्य ताकत और रक्षा बजट में जिस तरह के बदलाव कर रहा है, उसने चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ा कर रख दी है. पूरी दुनिया को आंख दिखाने वाले डोनाल्ड ट्रंप भी अब भारत के साथ बड़ी डील्स करने की बातें दोहरा रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका की बारूदी ताकत का दबदबा अब शिफ्ट हो रहा है? क्या भारत को दी गई धमकी अब ट्रंप को ही भारी पड़ने वाली है? क्या रूस और भारत की यह दोस्ती अमेरिका के घमंड को करारा जवाब है? भारत की यह रणनीतिक स्वायत्तता साफ बता रही है कि हिंदुस्तान किसी भी विदेशी ताकत के दबाव में नहीं आने वाला है.

 

ब्रह्मोस से लेकर सुखोई एसयू-57 तक: भारत-रूस की दोस्ती का नया अध्याय

 

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास बेहद पुराना और अटूट रहा है, लेकिन अब इसमें एक ऐसा पन्ना जुड़ने जा रहा है जो इतिहास बदल देगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को एक बेहद खास रक्षा गिफ्ट देने की पेशकश की है. पुतिन ने खुले मंच से कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर फिफ्थ जनरेशन (5th Generation) का सबसे खतरनाक स्टेल्थ फाइटर जेट ‘सुखोई एसयू-57’ (Sukhoi Su-57) डेवलप करना चाहते हैं. आपको बता दें कि साल 2017-18 के दौरान भी दोनों देशों के बीच फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट प्रोग्राम को लेकर लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन कुछ तकनीकी और रणनीतिक कारणों से बात नहीं बन पाई थी और भारत इस प्रोग्राम से अलग हो गया था. इसके बाद फरवरी 2025 में जब यह जेट ‘एयरो इंडिया एयर शो’ के लिए भारत आया, तब एक बार फिर इसकी चर्चाएं तेज हो गईं. रूस बैक चैनल और फ्रंट चैनल, दोनों ही तरीकों से लगातार भारत को यह जेट देने की पेशकश कर रहा था, लेकिन अब खुद राष्ट्रपति पुतिन ने इसका आधिकारिक प्रस्ताव दे दिया है.

 

1996 की ऐतिहासिक डील: जब सुखोई ने बदली थी इंडियन एयरफोर्स की किस्मत

 

भारत और रूस के बीच सुखोई विमानों की पहली ऐतिहासिक डील 30 नवंबर 1996 को हुई थी. उस वक्त यह डील करीब 1.462 बिलियन अमेरिकी डॉलर (यानी करीब 7155 करोड़ रुपये) की थी, जो उस समय के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी डिफेंस डील मानी गई थी. शुरुआत में भारत को 50 विमान मिलने थे, लेकिन बाद में भारत ने अपनी जरूरतों के हिसाब से ‘सुखोई एसयू-30 एमकेआई’ (Su-30 MKI) के कस्टमाइज्ड वर्जन की मांग की. साल 1998 से 2000 के बीच इस घातक विमान की पहली खेप भारत पहुंची. इसके बाद भारत ने लगातार इसके ऑर्डर्स बढ़ाए और आज भारतीय वायुसेना के पास 270 से ज्यादा सुखोई विमान मौजूद हैं, जिनका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) नासिक में कर रहा है. वर्तमान में भारत के पास इसका अपग्रेडेड वर्जन ‘सुपर सुखोई’ भी है, जिसमें भारत का स्वदेशी ‘विरूपाक्ष रडार’ और एडवांस डिजिटल सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे 4.5 प्लस जनरेशन की ताकत देता है.

 

पुतिन का ट्रंप को करारा जवाब, दुनिया के सामने की पीएम मोदी की तारीफ 

 

इस वक्त भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है. यही वजह है कि पिछले साल जब पीएम नरेंद्र मोदी व्हाइट हाउस के दौरे पर गए थे, तब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपना सबसे आधुनिक फाइटर जेट F-35 देने की पेशकश की थी. लेकिन अब पुतिन के नए सु-57 ऑफर ने ट्रंप की चिंताओं को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. पुतिन के इस दांव के तुरंत बाद ट्रंप ने भी पीएम मोदी की जमकर तारीफ की और साफ किया कि वह भारत के साथ हर हाल में डील करने के लिए बेताब हैं. ट्रंप एक तरफ दबाव की राजनीति करते हैं तो दूसरी तरफ तारीफ करके बैलेंस बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पुतिन भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं. पुतिन ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत एक बेहद मजबूत और स्वतंत्र देश है, जो किसी के दबाव में नहीं आता और अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले खुद करता है. पुतिन ने भारत की आर्थिक तरक्की का पूरा क्रेडिट पीएम मोदी के विजन और भारतीयों की कड़ी मेहनत को दिया. अनुमान है कि आने वाले समय में भारत और रूस का आपसी व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है.

 

ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के लिए भी तैयार रूस

 

अमेरिका के पास जहां F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग जैसे विमान हैं, वहीं चीन के पास J-20 माइटी ड्रैगन जैसा फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट है, जिसे एशिया-पैसिफिक में सबसे ताकतवर माना जाता है. लेकिन रूस का सुखोई सु-57 इन सभी का बाप माना जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि रूस इस विमान को न सिर्फ भारत को बेचने, बल्कि इसकी पूरी ‘तकनीक ट्रांसफर’ (Technology Transfer) करने और इसे भारत में ही बनाने के लिए तैयार हो गया है. सुखोई सु-57 अपनी अद्भुत कलाबाजियों (Maneuverability) और 3D थ्रस्ट इंजन की वजह से क्लोज कॉम्बैट यानी आमने-सामने की हवाई जंग में सबसे घातक साबित होता है. यह मैक 1.3 की सुपरक्रूज स्पीड से उड़ सकता है, जिससे ईंधन की भारी बचत होती है और इसकी अधिकतम रफ्तार मैक 2 तक जाती है. इसका रडार क्रॉस सेक्शन इतना कम है कि यह दुश्मनों के रडार की पकड़ में नहीं आता. यह एक साथ 60 टारगेट को ट्रैक कर उन पर एक साथ 16 मिसाइलें दाग सकता है. इसमें हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलें ले जाने की भी अद्भुत क्षमता है.

 

क्या है भारत के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट?

 

भारत फिलहाल अपने स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट ‘एमका’ (AMCA) पर तेजी से काम कर रहा है, क्योंकि भारत हमेशा के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रह सकता. रूस ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का साथ दिया है, तो वहीं अमेरिका के साथ भी भारत के व्यापारिक और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं. ऐसे में रूस और अमेरिका के इन महा-ऑफर्स के बीच भारत इस वक्त बेहद सोच-समझकर कदम बढ़ा रहा है. जियोपॉलिटिक्स का नियम है कि आप दोनों में से किसी भी महाशक्ति को नाराज नहीं करना चाहते. हालांकि ट्रंप के टैरिफ वाले बयानों से भारत-अमेरिका के रिश्तों में थोड़ी खटास जरूर आई है, लेकिन दुश्मनी जैसे हालात नहीं हैं. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुतिन के इस सुखोई सु-57 के महा-ऑफर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या अंतिम फैसला लेते हैं.

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