डेस्क :चार दिवसीय छठ पूजा शुरु हो गई है, सुख-समृद्धि, सौभाग्य की संकल्पना साकार करने के लिए सनातन धर्मावलंबी महिलाएं डाला छठ का कठिन व्रत कर रही हैं। त्याग की पराकाष्ठा के इस व्रत में व्रती उत्साह से ओतप्रोत होकर भजन-पूजन में लीन रहते हैं तो आइए हम आपको छठ पूजा व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।छठ महापर्व केवल एक दिन का त्योहार नहीं है बल्कि यह चार दिनों तक चलने वाला महापर्व है। पहले दिन नहाय खाय होता है, जिसमें दाल-चावल और कद्दू की सब्जी खाया जाता है। इसके अगले दिन खरना होता है इस दिन छठ व्रती पूरी निष्ठा से छठी मइया को खीर का प्रसाद बनाकर भोग लगाती हैं। लोहंडा का यह प्रसाद घर-परिवार और पास-पड़ोस में जनमानस को ग्रहण कराने का विधान है। पंडितों के अनुसार खरना का प्रसाद ग्रहण करने से जीवन के सारे दूख दूर होते हैं। छठी मइया व्रती की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। 27 अक्टूबर, सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को संध्याकालीन अर्घ्य अर्पण किया जाएगा। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतति वृद्धि की कामना आदित्य देव से करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ढलते सूरज को जल चढ़ाने से भगवान दिनकर छठ व्रती को भर-भरकर आशीष देते हैं।
