दरभंगा। ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा की स्मृति में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आदिवासी बाल कल्याण एवं संस्कृत शिक्षा समिति रायसेन, मध्य प्रदेश द्वारा प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत पत्रिका ‘गरीयसी’ का विमोचन प्रधान संपादक संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 लक्ष्मी निवास पाण्डेय , पुनरीक्षण समिति के वरिष्ठ सदस्य कुलसचिव प्रो0 ब्रजेश पति त्रिपाठी , पुनरीक्षण समिति के ही सदस्य साहित्य विभाग के सहायक प्रध्यापक डा सुधीर कुमार एवं पत्रिका के सम्पादक डॉ अवधेश कुमार श्रोत्रिय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। मौके पर कुलपति प्रो0 पांडेय ने कहा कि देवरहा बाबा सिद्ध पुरुष थे। उनकी स्मृति में प्रकाशित पत्रिका सन्त एवं समाज को जोड़ती है। साथ ही संस्कृत सम्बर्धन में बेहतर कार्य कर रही है। वहीं, कुलसचिव प्रो0 ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि देवराहा बाबा भगवान स्वरूप थे। उनकी स्मृति व कृति को जीवंत करते हुए पत्रिका का प्रकाशन बहुत ही पुनीत कार्य है। देवराहा बाबा से मिलने का सौभाग्य एक बार उन्हें भी मिला था। उनका जीवन निर्मल व उदार शांत था। इसलिए गरीयसी पत्रिका अपने उद्देश्यों में अवश्य सफल होगी।
उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि गरीयसी पत्रिका शास्त्र संवर्धन एवं संस्कृत का पुरजोर प्रचार एवं प्रसार करती है। साथ ही ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा के सिद्धांतों को लेकर गौसेवा, सन्त सेवा समेत अन्य सामाजिक कार्यों में सहयोग प्रदान करती है। इस पत्रिका को संतो का भी संरक्षण मिला रहा है। इस पत्रिका में प्रधान संरक्षक श्री स्वामी रामानुजाचार्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज श्री जानकी वल्लभ आश्रमकेशी घाट वृंदावन धाम, संरक्षक श्री स्वामी रामानुजाचार्य रामकृष्णाचार्य वेदान्ती जी महाराज ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा लोक सेवा आश्रम एवं यज्ञ पूर्णा गौशाला भोपाल एवं परामर्श प्रदाता श्री स्वामी रामानुजाचार्य बद्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज चित्रकूट धाम हैं।
