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एफआईआर वापस लेने की मांग पर अड़ा CJP, सरकार को दूसरा अल्टीमेटम; आंदोलन दोबारा शुरू करने के संकेत

डेस्क: पेपर लीक (Paper Leak) मामले को लेकर आंदोलन करने वाले संगठन CJP (CJP) ने केंद्र सरकार (Central Government) को दो दिनों के भीतर दूसरी बार चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) वापस नहीं ली गईं और सरकार अपने आश्वासनों का पालन नहीं करती, तो संगठन एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन (Nationwide Protest) शुरू करेगा। इस बयान के बाद आंदोलन के दोबारा तेज होने की संभावनाओं को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ किसी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही केवल प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिए गए लोगों को राहत देने की बात भी कही गई। हालांकि अदालत ने पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति भी दी है।

अदालत के आदेश के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन को आशंका है कि जांच जारी रहने के आधार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई हो सकती है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले लिखित आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा और भविष्य में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। इसी भरोसे पर संगठन ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन समाप्त किया था।
संगठन ने सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप भी लगाया है। CJP का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में प्रदर्शनकारियों को राहत देना चाहती है, तो वह प्रशासनिक स्तर पर एफआईआर वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई नहीं करने का निर्णय ले सकती है। संगठन का दावा है कि सार्वजनिक रूप से दिए गए आश्वासन और वर्तमान स्थिति के बीच अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे छात्रों और युवाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सौरव दास ने कहा कि सरकार को दिया गया समय अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने दोहराया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं, भविष्य में किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और सरकार अपने सभी वादों का पूरी तरह पालन करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर अमल नहीं हुआ तो संगठन एक बार फिर देशभर में आंदोलन शुरू करेगा और छात्र सड़कों पर उतरेंगे।
इससे पहले भी संगठन के एक अन्य प्रवक्ता ने सरकार के साथ हुए समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। संगठन लगातार मांग कर रहा है कि सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को राहत मिले, दर्ज मामलों को वापस लिया जाए और भविष्य में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई न हो।

गौरतलब है कि पेपर लीक मामले को लेकर CJP ने जून में नई दिल्ली के जंतर-मंतर से आंदोलन की शुरुआत की थी। बाद में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद सरकार और संगठन के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी। अब नए घटनाक्रम और ताजा चेतावनी के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित पक्ष आगे क्या कदम उठाते हैं तथा बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या आंदोलन एक बार फिर शुरू होता है।

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