कल 14 सितंबर को होगा तीसरे प्रशिक्षण शिविर का समापन, सभी सहभागी प्रतिभागी स्वयंसेवकों को दिए जाएंगे प्रमाण पत्र
दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के तत्त्वावधान में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर में दरभंगा जिला के 200 स्वयंसेवकों का सात दिवसीय आवासीय ‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत एवं एनएसएस लक्ष्य-गीत से हुआ। इस शिविर में संयोजक डॉ आर एन चौरसिया, कार्यक्रम पदाधिकारी- डॉ सुधांशु कुमार, डॉ युगेश्वर साह, भू- संपदा पदाधिकारी डॉ कामेश्वर पासवान, मनीष राज, सुमित कुमार झा, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अक्षय कुमार झा, विकास कुमार, सुमित कुमार, रवीन्द्र कुमार सिंह आदि ने भाग लिया।
प्रथम सत्र में मालिक कुमार ने ”जल, जीवन और हरियाली” विषय की जानकारी देते हुए कहा कि इन तीनों में अन्योन्याश्रय संबंध होता है। ये एक ही पर्यावरणीय श्रृंखला की तीन महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। जल की रक्षा जीवन की रक्षा है तथा हरियाली की रक्षा ही भविष्य की रक्षा है। इनसे हमारे जीवन में खुशहाली आती है। ये मानव जीवन, पर्यावरण एवं सतत विकास के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने जल के महत्व, उनके प्रकार, संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के सृजन आदि की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि बिहार में 2 अक्टूबर, 2019 को गांधी जयंती के अवसर पर “जल, जीवन हरियाली अभियान” का शुभारंभ हुआ। जल और हरियाली एक-दूसरे को पूरक हैं। पेड़-पौधे धरती के पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा जल-चक्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं। कृषि प्रधान राज्य बिहार में इनका विशेष महत्व है। कहा कि ‘जल, जीवन और हरियाली’ केवल सरकारी कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
द्वितीय सत्र में एसडीआरएफ प्रशिक्षक रूपेश कुमार पासवान ने ‘सर्प दंश- प्रबंधन’ पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सांपों के प्रकार, सांप काटने के कारण तथा विषैला सांप काटने पर उससे बचने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। कहा कि विश्व में 3000 से अधिक सांपों को प्रजातियां हैं, परंतु भारत में 275 प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जिनमें 15 प्रतिशत सांप ही बिषैले होते हैं। इनमें कोबरा, करैत, रसल वाइपर, पिट वाईपर आदि शामिल हैं, जिनमें करैत सर्वाधिक जहरीला होता है। सांप अपने भोजन की प्राप्ति हेतु तथा अपनी रक्षा हेतु काटता है। सांप काटने पर नींद आना, सांस लेने में परेशानी होना, मुंह से झाग आना है तथा कटे जगह पर दर्द होना आदि लक्षण हैं। सांप काटने पर झाड़ फूंक- की जगह सीधे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। वहीं सांप से बचने के लिए बाढ़, बारिश तथा रात एवं खेत में सतर्क चाहिए तथा बूट, जूता, फूल पैंट एवं शर्ट आदि पहनना चाहिए। जमीन पर नहीं लेटना तथा चूहा, मुर्गा, खरगोश आदि को निवास स्थल से दूर रखना चाहिए। विशेष जरूरत पर सांप भगाने के लिए फेनोल, कार्बनिक एसिड आदि का प्रयोग करना चाहिए।
अगले सत्र में प्रशिक्षण गौरव कुमार ने काफी रोचक ढंग से “पानी में डूबने के कारण, उत्पन्न समस्याएं एवं निदान” बताते हुए कहा कि बिहार के 15 जिले बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं और पर्व-त्योहार, अनियंत्रित तथा चढ़ने-उतरने के उतावलापन, तेज भाव तैरने की कुशलता के अभाव आदि के कारण डूबने की घटनाएं अधिक होती है। इससे बचने के लिए जागरुकता एवं प्राथमिक उपचार के साथ ही जीवन रक्षा के कौशल से बढ़ाना आवश्यक है। प्रशिक्षक संतोष कुमार ने वृक्षारोपण कब, कैसे, कहां और कितना आदि की विस्तृत जानकारी दी। इसके अभाव में मानव जीवन की कल्पना संभव है।
अंतिम तकनीकी सत्र में गौरव कुमार भीड़ नियंत्रण की जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक आयोजन, मेले, जुलूस, खेल प्रतियोगिता, राजनीतिक सभा, शादी-विवाह, सामूहिक भोज, परीक्षा केन्द्र, रेलवे स्टेशन तथा अफवाह आदि कारण हैं। भीड़ अनियंत्रण से जन-धन की हानि, सरकारी संपत्ति की क्षति, आयोजन पर कार्रवाई तथा शासन- प्रशासन की बदनामी होती है। कहा कि भीड़ नियंत्रण केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक एवं आम लोगों की भी सामूहिक जिम्मेदारी होती है। लोगों को जागरूक कर, अच्छा प्रबंधन, सुरक्षा बल एवं प्रशासन की उचित व्यवस्था, अफवाह रोककर, पर्याप्त निकासी मार्ग की व्यवस्था कर भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है।
वैभव झा के नेतृत्व में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुस्कान एवं माधवी कुमारी, काजल, मासूम, अपर्णा, सक्रीन फातमा, कृष्णा, सदाफ, सल्तनत, प्रसन्न चौधरी, विजय, अरुण, श्रुति, कोमल, सानिया, अनुष्का, अर्णव, राजलक्ष्मी, अमित कुमार झा, अमृत, दयाराम, मो क़ासिद, अमरनाथ, नेहा, कंचन आदि ने सराहनीय रूप से भाग लिया। प्रातः काल में मुकेश, मणिकांत, वैभव एवं अंकिता के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने पीटी, योग के बाद संस्कृत विश्वविद्यालय एवं मिथिला विश्वविद्यालय के परिसरों का भ्रमण कर विभिन्न जानकारियां प्राप्त की।

