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दरभंगा : बीएड (नियमित) विभाग की एनएसएस इकाई एवं स्वास्थ्य केंद्र द्वारा आयोजित ‘स्वैच्छिक रक्तदान शिविर’ में 20 लोगों ने किया रक्तदान

रक्तदान सर्वधर्म समभाव का प्रतीक जो मानवता, करुणा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को करता है प्रोत्साहित- कुलसचिव

रक्तदान पीड़ित मानव जीवन को बचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम, इससे परम संतुष्टि एवं आत्मगौरव की होती है अनुभूति- डॉ. चौरसिया

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के बीएड (रेगुलर) विभाग की एनएसएस इकाई एवं स्वास्थ्य केन्द्र के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ के अवसर पर बीएड विभाग में आयोजित “स्वैच्छिक रक्तदान शिविर” में 20 व्यक्तियों ने रक्तदान किया, जिनमें डॉ उदय कुमार, डॉ. योगेश्वर साह, डॉ. कीर्ति चौरसिया, अमित कुमार झा, रवीन्द्र कुमार सिंह, पवन कुमार, विशाल कुमार, अमन कुमार, अंजली कुमारी, नीतू कुमारी, काजल कुमारी, शुभम राज, विशाल कुमार, गोविन्द कुमार, देवांगी घोष, विजय कुमार, मदन कुमार, सल्तनत अंजुम, मुकेश कुमार झा तथा ध्रुव कुमार के नाम शामिल हैं, जिन्हें डीएमसीएच की ओर से रक्तदाता प्रमाण-पत्र दिया गया।

 

लाल फीता काटकर शिविर का उद्घाटन करते हुए कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने रक्तदान को जीवनदान बताते हुए कहा कि थोड़ा-सा रक्तदान कर किसी के जीवन को बचाने से बड़ी बात कुछ और नहीं हो सकती है। यह मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करता है। कहा कि रक्तदान सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है, क्योंकि पाखंडी एवं घमंडी व्यक्ति भी धर्म, जाति, गरीब-अमीर आदि देखें बिना किसी भी व्यक्ति का रक्त जरूरी होने पर स्वीकार करने को मजबूर हो जाता है। चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गीतेन्द्र ठाकुर ने कहा कि कोई भी 18 से 65 वर्ष का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका हीमोग्लोबिन 10 एमजी से अधिक है, वे निर्भीक होकर वर्ष में कम से कम दो बार रक्तदान कर सकते हैं। कहा कि एक व्यक्ति का अभी तक 40 वर्षों में 180 बार रक्तदान करने का विश्व रिकॉर्ड है।

बीएड के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार मिलन ने कहा कि हमारा शिक्षाशास्त्र विभाग न केवल छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान देता है, बल्कि सामाजिक दायित्व निभाना भी सीखता है। रक्तदान समाज में मानवीय मूल्य एवं सेवा भावना को मजबूत करता है। डॉ आर एन चौरसिया ने स्वैच्छिक रक्तदान के महत्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि रक्तदान पीड़ित मानव जीवन को बचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है। इससे परम संतुष्टि एवं आत्मगौरव की अनुभूति होती है। रक्त ईश्वर द्वारा मानव को दिया गया अमूल्य उपहार है। कहा कि जीवन रक्षक रक्त को प्रयोगशाला या फैक्ट्री में नहीं बनाया जा सकता है, न ही जानवरों या पक्षियों के रक्त मानव को चढ़ाया जा सकते हैं।
रक्त अधिकोष, डीएमसीएच, दरभंगा के डॉ रंजन कुमार के नेतृत्व में टीम ने रक्तदान में सहयोग एवं रक्त संचय किया। डॉ रंजन कुमार ने कहा कि यदि एक प्रतिशत लोग भी नियमित रूप से रक्तदान करते रहें तो अधिकांश रक्त की आवश्यकता पूरी हो सकती है। कहा कि रक्त जांच के बाद सभी रक्तदाताओं को उनके मोबाइल पर लिंक के माध्यम से डोनर कार्ड एक सप्ताह में भेज दिया जाएगा। कुलसचिव का स्वागत पाग, चादर, कलम एवं बुके आदि से किया गया। इस अवसर पर डॉ. निधि वत्स, डॉ. प्रेम कुमारी, समरेश कुमार, अक्षय कुमार झा आदि सहित 50 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे।

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