पटना: बिहार की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों के बीच एक अहम बदलाव सामने आया है। सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से संजय गांधी का नाम हटा दिया है। इस फैसले के बाद पटना का प्रसिद्ध चिड़ियाघर अब आधिकारिक तौर पर ‘पटना जू’ कहलाएगा, जबकि डेयरी शिक्षा से जुड़ा संस्थान ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ के नाम से जाना जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव संस्थानों की पहचान को उनके स्थान और कार्यक्षेत्र के आधार पर स्थापित करने के लिए किया गया है। हालांकि, इस निर्णय को सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि बदलते सियासी संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।
‘पटना जू’ बना नई पहचान का केंद्र:
राजधानी पटना का चर्चित संजय गांधी जैविक उद्यान अब सरकारी दस्तावेजों में ‘पटना जू’ के नाम से दर्ज होगा। दिलचस्प बात यह है कि आम लोग पहले से ही इसे इसी नाम से बुलाते रहे हैं, लेकिन अब इसे आधिकारिक मान्यता मिल गई है।
इतिहास की बात करें तो इस चिड़ियाघर की नींव 1969 में पड़ी थी और 1973 में इसे आम लोगों के लिए खोला गया। समय के साथ यह देश के बड़े चिड़ियाघरों में शामिल हो गया, जहां सैकड़ों प्रजातियों के जीव-जंतु और सैकड़ों प्रकार के पेड़-पौधे मौजूद हैं।
डेयरी संस्थान को मिला नया नाम, पुरानी विरासत बरकरार:
दूसरा बड़ा बदलाव डेयरी शिक्षा से जुड़े संस्थान में हुआ है। पहले ‘संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ के नाम से जाना जाने वाला यह संस्थान अब ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ कहलाएगा।
यह संस्थान बिहार पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित होता है और राज्य में डेयरी शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहां छात्रों को डेयरी टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग, क्वालिटी कंट्रोल और डेयरी बिजनेस मैनेजमेंट जैसी आधुनिक शिक्षा दी जाती है।
सियासत बनाम पहचान: फैसले के मायने:
इस पूरे फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस शासनकाल में स्थापित संस्थानों से जुड़े नामों को हटाना, मौजूदा सरकार की वैचारिक दिशा को दर्शाता है। वहीं, सरकार इसे संस्थानों को “लोकल और प्रोफेशनल पहचान” देने की पहल बता रही है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है यह प्रशासनिक सोच, राजनीतिक संकेत और पहचान की नई परिभाषा को भी दर्शाता है।
आशुतोष झा

