डेस्क: कई निवेशक हाल के महीनों में सोना और चांदी (Gold and Silver) के शानदार रिटर्न देखकर चूक गए अवसर पर सोच में पड़ गए हैं। जहां पिछले एक साल में सोने ने लगभग 56% और चांदी ने करीब 155% का रिटर्न दिया है, वहीं अब निवेश की दुनिया में ETF (Exchange Traded Fund) को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है।
ETF अब सिर्फ सोना-चांदी तक सीमित नहीं
ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड अब केवल गोल्ड और सिल्वर तक सीमित नहीं रहे। यह अब निवेश की एक “मल्टी-ऑप्शन टोकरी” बन चुके हैं, जिसमें बैंकिंग, आईटी, सरकारी बॉन्ड और यहां तक कि अमेरिकी शेयर बाजार तक में निवेश का मौका मिलता है। भारत में पैसिव निवेश की समझ बढ़ने के साथ ETF में निवेश में भी तेजी आई है।
ETF में निवेश में जबरदस्त उछाल
वित्त वर्ष 2025-26 में ETF में निवेश पिछले साल की तुलना में करीब 94% बढ़ा है। खासकर गोल्ड ETF में निवेश लगभग 350% और सिल्वर ETF में 296% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण इनका शानदार रिटर्न रहा है।
क्यों बढ़ रही है ETF की लोकप्रियता?
ETF को लोकप्रिय बनाने में तीन मुख्य कारण हैं—
कम लागत: फंड केवल इंडेक्स को फॉलो करता है, इसलिए खर्च कम होता है।
पारदर्शिता: यह किसी इंडेक्स की हूबहू नकल करता है।
आसान ट्रेडिंग: इसे शेयर की तरह किसी भी समय खरीदा या बेचा जा सकता है।
ETF के प्रमुख प्रकार
ETF कई तरह के होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
इक्विटी ETF: जैसे Nifty 50, Sensex आधारित फंड, साथ ही बैंकिंग और आईटी सेक्टर ETF
कमोडिटी ETF: गोल्ड और सिल्वर ETF
डेट/बॉन्ड ETF: सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश
इंटरनेशनल ETF: जैसे Nasdaq 100 और S&P 500 में निवेश का मौका
ETF चुनते समय क्या देखें?
निवेश से पहले तरलता, एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर पर ध्यान देना जरूरी है। जिन ETF में ट्रेडिंग ज्यादा होती है, वे बेहतर माने जाते हैं। कम खर्च और कम ट्रैकिंग एरर वाले ETF लंबे समय में ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।
निवेश में समझदारी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार ETF में निवेश करते समय सिर्फ ट्रेंड को फॉलो करना पर्याप्त नहीं है। एसेट एलोकेशन, एंट्री-एग्जिट टाइमिंग और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की जिम्मेदारी निवेशक की होती है। सही रणनीति और दीर्घकालिक सोच ही बेहतर रिटर्न की कुंजी है।

