पुणे। मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और गहरी आस्था का अद्भुत संगम पुण्यनगरी पुणे में सीता नवमी के अवसर पर देखने को मिला। मिथिला समाज संस्था, पुणे एवं विद्यापति मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “मां जानकी प्रकट उत्सव” पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस आयोजन ने न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को प्रबल किया, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन दिघी स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में किया गया, जहां 500 से अधिक श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे कार्यक्रम को सफल बनाया।
इस अवसर पर 251 दीपों का सामूहिक प्रज्वलन मुख्य आकर्षण रहा। दीपों की उज्ज्वल आभा से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा और वातावरण में एक दिव्य अनुभूति का संचार हुआ। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दीपावली का उत्सव हो। भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ के माध्यम से श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान प्रभु श्रीराम और माता जानकी की पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। भक्ति गीतों और कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
इस आयोजन को सफल बनाने में संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मिथिला समाज संस्था की अध्यक्ष संगीता चौधरी, उपाध्यक्ष जटाशंकर चौधरी, सचिव ऋषि झा, कोषाध्यक्ष अजय मिश्रा, सदस्य सुनील ठाकुर, विजय मिश्रा, स्नेहा झा, परेश ठाकुर, आशुतोष झा रॉकी, नूतन ठाकुर, ममता ठाकुर, अपर्णा, निधि,निशा,भावना कुमार सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया।
वहीं विद्यापति मित्र मंडल के अध्यक्ष पप्पू साह, सचिव अशोक दास, सदस्य रंजीत झा, शंभु चौधरी आदि ने भी आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि पुणे में बसे मिथिला समाज के लोगों के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और एकता को सहेजने का सशक्त माध्यम भी बना। सीता नवमी के इस भव्य उत्सव ने यह संदेश दिया कि जहां आस्था होती है, वहां संस्कृति और समाज दोनों मजबूत होते हैं।
आशुतोष झा

