
दरभंगा। बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयकों की सीएनए खाता से टीएसए हाइब्रिड मॉड्यूल में रूपांतरण के संबंध में राष्ट्रीय सेवा योजना, क्षेत्रीय निदेशालय, पटना के तत्त्वावधान में समीक्षात्मक बैठक युवा कार्य विभाग, भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, नई दिल्ली के अपर सचिव नीतेश कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में ए एन कॉलेज, पटना में आयोजित की गई, जिसमें एनएसएस, पटना के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार-विषय प्रवेशक, युवा अधिकारी प्रियव्रत मंडल, युवा सहायक दीपक मंडल,अंकित पाठक, बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना के आलोक कुमार सिंह, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से डा आर एन चौरसिया, संस्कृत विश्वविद्यालय से डा सुधीर कुमार, पटना विश्वविद्यालय से डा सुहेली मेहता,भागलपुर विश्वविद्यालय से डा राहुल कुमार, मुंगेर विश्वविद्यालय से डा मुनेन्द्र कुमार सिंह एवं अन्य एनएसएस समन्वयक, प्रताप नारायण संस्कृत महाविद्यालय, बौंसी, बांका से डा राजेश्वर पासवान सहित अनेक एनएसएस पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने भी भाग लिया। एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार के नेतृत्व में क्षेत्रीय निदेशालय, पटना परिवार की ओर से अपर सचिव का स्वागत पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। ए एन कॉलेज के कार्यक्रम पदाधिकारी के संचालन में आयोजित बैठक में एनएसएस का लक्ष्य गीत कॉलेज के स्वयंसेवकों ने प्रस्तुत किया। प्रधानाचार्य प्रो शैलेश सिंह ने करते हुए एनएसएस के महत्व को रेखांकित किया।
नीतेश कुमार मिश्रा ने कहा मूलतः एनएसएस समाजसेवा का कार्य है, जिसमें स्वयंसेवक स्वत: ही सेवा भाव से जुड़ते हैं, जिनके लिए आने वाले समय में पूरे देश में एक समान अधिक लाभ दिए जाएंगे। एनएसएस, पटना के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया खाता टीएसए हाइब्रिड मोड परिवर्तित होने से मंत्रालय से सीधे यूनिट के अकाउंट में एनएसएस की राशि ससमय भेजी जाएगी, जिससे वित्तीय पारदर्शिता भी बनी रहेगी। इस व्यवस्था से ई- पेमेंट हो सकेगा और मोबाइल पर आए ओटीपी से ही भुगतान सुनिश्चित हो जाएगा, बैंक नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया आयोजित कार्यक्रमों के जियो टैग फोटो माय भारत पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। बिना यूटिलाइजेशन दिए अगले वित्तीय वर्ष की राशि जारी नहीं की जाएगी। अपर सचिव ने सभी कार्यक्रम समन्वयकों से एनएसएस संबंधी विभिन्न समस्याओं को रूचि पूर्वक सुना तथा उनका निदान भी बताया।
