डेस्कः सीजफायर के बाद राहत की उम्मीद कर रहे तेल बाजार को फिर झटका लगा है। एक दिन की गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। इसकी वजह यह है कि पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई को लेकर अब भी चिंताएं बनी हुई हैं।
ईरान का कहना है कि वह Strait of Hormuz से रोजाना केवल 12 जहाजों को गुजरने देगा और उनसे टोल वसूलेगा। वहीं Donald Trump ने दावा किया है कि इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोला जाएगा और टोल फ्री बनाया जाएगा। दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
कीमतों में कितनी आई तेजी?
ब्रेंट क्रूड करीब 2.86% बढ़कर 97.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया
डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.56% चढ़कर 97.77 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है
हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में दोनों बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गए थे। खासकर WTI में अप्रैल 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
Strait of Hormuz दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। इराक, सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग के जरिए निर्यात करते हैं। यही वजह है कि इस रूट में किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर असर पड़ता है।
बढ़ती चिंता: जहाजों की आवाजाही अभी भी सीमित
सीजफायर की घोषणा के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। बुधवार को इस स्ट्रेट से केवल 4 जहाजों के गुजरने की खबर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। शिपिंग कंपनियां भी सतर्क हैं और उनका कहना है कि वे पूरी स्पष्टता मिलने तक आवाजाही सामान्य नहीं करेंगी।
क्या यह सबसे बड़ा तेल संकट बन सकता है?
हाल के घटनाक्रम को देखते हुए विशेषज्ञ इसे अब तक के सबसे बड़े तेल संकटों में से एक मान रहे हैं। पहले इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर था।
