डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए टालने के संकेत देने के बाद आज 8 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखी गई। इस फैसले से ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कुछ कम हो गई हैं।
अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कच्चे तेल (US Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जो हाल के हफ्तों में Strait of Hormuz को लेकर बढ़े तनाव के कारण बढ़ी थीं। बताया गया है कि ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलता है, तो अमेरिका हमलों को अस्थायी रूप से रोक सकता है। इस घोषणा के बाद बाजारों में राहत देखने को मिली।
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। प्रमुख सूचकांकों से जुड़े फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों ने हालिया तनाव के बाद राहत की सांस ली है। Strait of Hormuz, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति गुजरती है, इस पूरे विवाद का केंद्र रहा है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर प्रतिबंध लगाने से पिछले कुछ हफ्तों में तेल कीमतों में तेजी और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
ट्रंप की ओर से पहले तय समयसीमा के कारण बाजार में तनाव बना हुआ था, क्योंकि व्यापारियों को आशंका थी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। हालांकि, संभावित संघर्ष विराम (सीजफायर) की खबर से वैश्विक बाजारों में तेजी आई। एशियाई बाजारों में भी उछाल देखा गया, जहां Nikkei 225 और KOSPI में बढ़त दर्ज की गई।
हाल के हफ्तों में Strait of Hormuz के बंद होने या सीमित होने की आशंकाओं के चलते तेल कीमतों में तेज उछाल आया था। यह मार्ग वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति शामिल है। तनाव में कमी के बावजूद विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रस्तावित दो सप्ताह का विराम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान पूरी तरह से समुद्री मार्ग खोलता है और दोनों पक्ष आगे किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से बचते हैं।
इस बीच, खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि यह अस्थायी शांति कितनी टिकाऊ साबित होगी। पिछले कई हफ्तों से जारी इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। सीमित शिपिंग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को बढ़ाया है। भारत जैसे देशों के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर हैं, तेल कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव महंगाई, मुद्रा स्थिरता और आर्थिक विकास पर असर डाल सकता है।
