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रूसी तेल पर अमेरिका की अस्थायी छूट से बढ़ा विवाद, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, जर्मनी ने भी उठाए सवाल

डेस्क: वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच रूसी तेल (Russian Oil) पर अमेरिका (America) की ओर से दी गई अस्थायी छूट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की (President Zelenskyy) ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है और कहा है कि इससे रूस के खिलाफ बनाए गए आर्थिक दबाव को कमजोर किया जाएगा।
दरअसल, पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज के बंद होने के बाद वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। इस स्थिति में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है।

जेलेंस्की की कड़ी प्रतिक्रिया

पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने कहा कि यह कदम रूस की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। उनके अनुसार, इस एक फैसले से ही रूस को करीब 10 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त आय मिल सकती है, जिससे युद्ध को जारी रखने की उसकी क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि रूस तेल और गैस की बिक्री से मिलने वाली कमाई का इस्तेमाल हथियार खरीदने में करता है, जिनका इस्तेमाल बाद में यूक्रेन के खिलाफ किया जाता है। इसलिए ऐसे फैसले शांति प्रक्रिया में मददगार नहीं हो सकते।

जर्मनी की भी आपत्ति

अमेरिकी फैसले पर जर्मनी के चांसलर फ्रैड्रिक मर्त्ज ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि G7 के छह देशों ने इस निर्णय पर असहमति जताई थी। उनके मुताबिक मौजूदा स्थिति में वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी नहीं है, बल्कि कीमतों में उतार-चढ़ाव की समस्या है, इसलिए यह फैसला समझना मुश्किल है।

हालांकि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि यह छूट सीमित और अस्थायी है, इसलिए इससे रूस को बहुत अधिक लाभ मिलने की संभावना कम है।

अमेरिका ने क्यों दी छूट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही रूसी तेल खरीद को लेकर कई देशों पर दबाव बना चुके हैं। उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और यूरोपीय देशों को भी ऐसी चेतावनी दी थी।
लेकिन 28 फरवरी के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति तेजी से बदली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के चलते तेल उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ा। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कई जहाज समुद्र में फंस गए, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का तर्क

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार यह छूट अस्थायी है और केवल उन रूसी तेल कार्गो के लिए दी गई है जो पहले से समुद्री रास्तों में मौजूद हैं। उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखना और युद्ध के कारण पैदा हुई आपूर्ति की कमी को कम करना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल उत्पादन में बाधा बनी रहती है तो बढ़ती कीमतों का लाभ रूस को भी मिल सकता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा निर्यात पर निर्भर करती है।

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