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युद्ध का असर डेयरी बाजार पर भी, दूध-पनीर की सप्लाई पर संकट; खाड़ी देशों में खाली हो सकते हैं रेफ्रिजरेटर

डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब केवल तेल और गैस (oil and gas) तक सीमित नहीं रह गया है। रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक डेयरी व्यापार को भी चिंता में डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समुद्री मार्ग में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है तो खाड़ी देशों में दूध, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क जैसी जरूरी डेयरी वस्तुओं की सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जलमार्ग में व्यवधान आने से इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई और सऊदी अरब के पूर्वी हिस्सों में समुद्री सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इन बाजारों में मुख्य रूप से होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क की भारी मांग रहती है।

<span;>मध्य पूर्व: सबसे बड़ा आयात आधारित डेयरी बाजार

मध्य पूर्व दुनिया के सबसे अधिक आयात-निर्भर डेयरी बाजारों में शामिल है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में इस क्षेत्र ने करीब 13 लाख टन डेयरी उत्पाद आयात किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 4.2 अरब डॉलर रही। यह आंकड़ा बताता है कि इस क्षेत्र की खाद्य आपूर्ति वैश्विक सप्लाई चेन पर कितनी निर्भर है।

<span;>किन देशों की निर्भरता सबसे ज्यादा

हालांकि Iran खुद डेयरी उत्पादों का बड़ा आयातक नहीं है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति इसे खाड़ी देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

Saudi Arabia हर साल लगभग 2.1 अरब डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात करता है।
United Arab Emirates करीब 1.5 अरब डॉलर के आयात के साथ दूसरे स्थान पर है।
Iraq लगभग 76.3 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पाद खरीदता है।
इसके अलावा Oman, Bahrain, Kuwait और Qatar भी बड़ी मात्रा में डेयरी उत्पाद आयात करते हैं।

<span;>जीसीसी देशों में यूएई सबसे बड़ा बाजार

Gulf Cooperation Council (GCC) देशों ने 2024 में लगभग 2.7 अरब डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात किए। इनमें से करीब 43 प्रतिशत हिस्सा अकेले United Arab Emirates का रहा, जिससे यह क्षेत्र का सबसे बड़ा डेयरी बाजार बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई में प्रति व्यक्ति औसतन करीब 170 डॉलर के डेयरी उत्पाद हर साल आयात किए जाते हैं।

<span;>सबसे ज्यादा असर किन उत्पादों पर

विशेषज्ञों के मुताबिक इस संकट से तीन प्रमुख उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं—होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क। ये तीनों मिलकर मध्य पूर्व के कुल डेयरी आयात का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।
अकेले यूएई हर साल करीब 2 लाख टन होल मिल्क पाउडर आयात करता है, जबकि पनीर उसके कुल डेयरी आयात मूल्य का लगभग 28 प्रतिशत है।

<span;>वैश्विक निर्यातकों के लिए भी चुनौती

अगर खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो इसका असर बड़े निर्यातक देशों पर भी पड़ेगा। इनमें European Union, New Zealand और United States प्रमुख हैं, जो इस क्षेत्र को बड़ी मात्रा में दूध पाउडर, पनीर, मक्खन और कंडेंस्ड मिल्क निर्यात करते हैं।

स्थिति को और जटिल बनाने वाला एक और अहम समुद्री मार्ग Bab el-Mandeb Strait है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। अगर होर्मुज और यह मार्ग दोनों अस्थिर हो जाते हैं तो वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

<span;>लंबा रास्ता, बढ़ेगा खर्च

ऐसी स्थिति में रेफ्रिजरेटेड डेयरी उत्पादों से भरे जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे पर स्थित Cape of Good Hope के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ सकता है। इससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन का समय बढ़ेगा, बल्कि मालभाड़ा भी काफी महंगा हो जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान-नियंत्रित कोल्ड चेन पर निर्भर डेयरी उत्पादों के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन सकती है और खाड़ी देशों में खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

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