डेस्क:भारत के रसोई घरों से लेकर सड़कों पर समोसे तलने वाली कड़ाही तक, आज सब कुछ एक गहरे संकट की गिरफ्त में है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की चिंगारी ने भारत की LPG सप्लाई चेन को झुलसा कर रख दिया है। जमीनी हालात इतने भयावह हैं कि लोग इसे ‘कोविड लॉकडाउन’ के बाद का सबसे बुरा दौर बता रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर किलोमीटर लंबी कतारें और ब्लैक मार्केट में 3,000 रुपये तक पहुँचती सिलेंडर की कीमतें आम आदमी की कमर तोड़ रही हैं। नोएडा के सेक्टर 16 में स्टॉल चलाने वाले प्रमोद कुमार की कहानी आज लाखों छोटे व्यापारियों की हकीकत है। प्रमोद बताते हैं, “जो सिलेंडर 1,000 में मिलता था, वह अब ब्लैक में 2,300 का मिल रहा है। समोसे के दाम बढ़ा दिए हैं, लेकिन डर है कि कल दुकान खोल भी पाऊंगा या नहीं।” यही हाल सेक्टर 18 के आटा मार्केट और दिल्ली-NCR के अन्य इलाकों का है, जहाँ ईंधन की कमी के कारण दर्जनों ढाबे बंद हो चुके हैं। कई ढाबा मालिकों ने रोटी और पराठा बनाना बंद कर दिया है क्योंकि वे अब केवल लकड़ी के तंदूर के भरोसे हैं।
अनगिनत खाने के बिज़नेस, बड़े और छोटे, या तो बंद होने की कगार पर हैं या पहले ही बंद हो चुके हैं क्योंकि LPG सिलेंडर बस अवेलेबल नहीं हैं। एक लेबर यूनियन के मुताबिक, खाने की जगहों के बंद होने या मेन्यू में कटौती से लाखों गिग वर्कर्स पर असर पड़ा है, जिन्हें काम से हाथ धोना पड़ रहा है। उसने कहा कि LPG क्राइसिस ने कई शहरों में डिलीवरी का काम 50-60% तक कम कर दिया है।
