राष्ट्रीय संगोष्ठी में मानव जीवन मे साहित्य के प्रयोजन पर विद्वानों ने दिए अपनी राय
दरभंगा। साहित्य मानव जीवन में समझदारी लाता है। अच्छे- बुरे के भाव को समझने में सहायता करता है। इतना ही नहीं, वह मानव के भीतर लोक मंगल की भावना भी उत्पन्न करता है जो समाज व देश के लिए बेहद जरूरी है। साहित्य एकता और नेकता भी लाता है। ऐसे में देखें तो साहित्य मानव में देवत्व प्रदान करने की क्षमता रखता है। उक्त बातें मानव जीवन में साहित्य की प्रयोजनीयता विषय पर राजकीय संस्कृत महाविद्यालय ,काजीपुर, पटना में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राँची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जंगबहादुर पाण्डेय ने कही।
पीआरओ डॉ निशिकांत के अनुसार, विशिष्ट वक्ता पूर्व़ ऐसोसिएट प्रोफेसर डॉ श्याम सुंदर पाण्डेय ने मानव जीवन में साहित्य की प्रयोजनीयता पर बात करते हुए कहा कि साहित्य मानव जीवन को नैतिकता प्रदान करता है। मनुष्य में मनुष्यता प्रदान करता है, साहित्य जीवन के समग्र क्रियाकलापों से जुड़ा रहता है।
सारस्वत वक्ता रामेश्वरलता महाविद्यालय, दरभंगा के सहायक प्राध्यापक डॉ सुनील कुमार ने कहा कि साहित्य मनुष्य की आत्मा एवं हृदय को विमुक्ति की राह दिखाता है। मानव का मार्गदर्शन करता है तथा जीवन जीने की कला प्रदान करता है। कार्यक्रम के संरक्षक कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ,दरभंगा थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने की तथा कार्यक्रम की संयोजिका डॉ अल्का कुमारी ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का संचालन किया। स्वागत भाषण प्रोफेसर उमेश शर्मा जी ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ विवेकानन्द पासवान ने किया। इस अवसर पर कवयित्री मीना परमार,मिंटू शर्मा, कवि मनोज गोवर्धनपुरी ,डॉ राजेन्द्र कुमार ने कविता पाठ किया । संगोष्ठी में डॉ ज्योत्सना, डॉ अनिल कुमार झा, डॉ शिवानंद शुक्ला,डॉ शबाना शिरीन आदि विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। छात्र- छात्राओं ने मनोयोग पूर्वक साहित्य की जीवन में उपादेयता को समझा।
