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21 नवंबर को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में होने वाले 11 वें दीक्षांत समारोह की युद्ध स्तर चल रही तैयारी

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में 21 नवंबर को होने वाले 11 वें दीक्षांत समारोह की तैयारी युद्ध स्तर पर की जा रही है।लनामिविवि के कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी के दिशा निर्देश में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खां मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता करेंगे। वही शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ अतुल कोठारी दीक्षांत-वक्ता होंगे। वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो ए के त्यागी व आईआईटी, पटना के निदेशक प्रो टी एन सिंह सम्मानित अतिथि द्वय होंगे। समारोह की तैयारी के उद्देश्य से प्रो अशोक कुमार मेहता की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें परीक्षा नियंत्रक डॉ इंसान अली, डब्ल्यूआईटी के निदेशक प्रो अजय नाथ झा,एनएसएस समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया, पूर्व उप कुलसचिव (प्रथम) डॉ राजीव कुमार, उप परीक्षा नियंत्रक डॉ मनोज कुमार,उप कुलसचिव (प्रथम) डॉ उमाकांत पासवान,प्रेस मैनेजर डॉ दिवेश कुमार शर्मा, मुरारी कुमार तथा उमेशचन्द्र झा आदि उपस्थित थे।

प्रो अजयनाथ झा ने बताया दीक्षांत समारोह से संबंधित काम तेजी से किये जा रहे हैं जो निर्धारित समय तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। दीक्षांत स्थल डॉ नगेन्द्र झा स्टेडियम में पंडाल आदि का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है जो 18 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यह आयोजन शैक्षणिक जगत का सबसे प्रमुख अवसर है, जहां विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के वरिष्टतम अभिभावक कुलाधिपति द्वारा दीक्षित किया जाएगा। प्रो अशोक कुमार मेहता ने बताया दीक्षांत समारोह से संबंधित कार्यक्रमों की संभावित रूपरेखा को तैयार कर ली गई है। शैक्षणिक दीक्षांत यात्रा के अवसर पर सम्मिलित होने वाले विद्वतपरिषद् , अभिषद,अधिषद के सदस्यों, शिक्षकों, पदाधिकारियों आदि के पहचान पत्रों को तैयार करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। कार्यक्रम को लेकर कुलपति के आदेश से बनाई गई विभिन्न समितियों की नियमित रूप से बैठकें हो रही हैं, जिनके निर्णयों एवं संपादित कार्यों से कुलपति को अवगत कराया जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक डॉ इंसान अली ने बताया कि दीक्षांत समारोह से संबंधित प्रमाण पत्रों आदि से संबंधित तैयारी पूरी कर ली गई। पदाधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के बीच कार्यों को बांटकर संपादित कराया जा रहा है। कुलपति से निर्देश प्राप्त कर अनुभवी एवं वरिष्ठ सदस्यों का भी अधिक से अधिक सहयोग लिया जा रहा है।

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