
दरभंगा। तालाबों, पोखरो से लेकर अपने घर के परागों से लेकर इत्यादि स्थलों पर कृत्रिम तालाब तक में किया गया। छठ पूजा पर भारी संख्या में छठवांतियों की भीड़ तालाबों औरपोखरो पर देखी गई। मंगलवार की अहले सुबह जब सूर्य की पहली किरणों ने धरती को स्पर्श किया तब पूरे दरभंगा शहर में आस्था और श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा। महापर्व छठ पूजा अपने चरम पर पहुंच गया। शहर के विभिन्न तालाबों, पोखरों और कृत्रिम घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष सूर्य देव को प्रातः कालीन अर्ध अर्पित करते हुए नजर आए। छठ वर्तियों ने उदयमान सूर्य को दूध,जल, ठेकुआ-भुजिया जैसे पारंपरिक प्रसादों से अर्ध अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और कल्याण की कामना की। शहर के कन्हैया मिश्र पोखर वार्ड नंबर 47 इसके साथ ही जेल तालाब लहेरियासराय, सैदनगर काली स्थान पोखर, नाका नंबर 7 पोखर लोहिया चौक, कचहरी पोखर बाकरगंज लहेरियासराय, जिला स्कूल, मतरंजन तालाब रहमगंज,हरि बोल तालाब वार्ड 21, हराई तालाब दरभंगा,मिर्जापुर गौशाला के पास स्थित तालाब, मनहर लाल तालाब,भगवान दास तालाब कृत्रिम तालाब, मौलागंज अवस्थित कृत्रिम तालाब सहित कई अन्य छठ घाटों पर व्रतियों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं का यह जन सैलाब चारों ओर एक अद्भुत धार्मिक वातावरण बना रहा। पूरे शहर के छठ घाटों को रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट और खूबसूरत बल्बों से जगमगाया गया था। छठ घाटों की यह रौनक और शांति का माहौल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा। हर तरफ जय छठी मईया के जयघोष और भजन की गूंज से पूरा दरभंगा शहर भक्तिमय हो गया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस बलों की बड़ी तैनाती की गई थी। एनडीआरएफ की टीम बड़े तालाबों में लगातार कैंप करती दिख रही थी ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस बार भगवती नदी में जलस्तर ज्यादा होने के कारण छत नहीं मनाई गई बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था एवं खाली जगहो पर कृत्रिम छठघाट का निर्माण कराकर दरभंगा नगर निगम एवं जिला प्रशासन के सहयोग से किया गया था। कुछ ऐसे लोग भी थे जो हर साल छठ पूजा नदी में करते थे. इस बार घरों के छतो और खाली जगहों पर और सड़को पर अस्थाई छठ घाट का निर्माण कराया गया।