तलाड़ा में विधवा मां-बेटी का उजड़ा आशियाना, सर्दियों के मौसम में कैसे रहेंगी मां-बेटी नगर संवाददाता- सैंज
सैंज घाटी की तलाड़ा पंचायत में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते विधवा मां-बेटी का आशियाना पूरी तरह उजड़ गयाअब यह बेसहारा मां-बेटी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद अब तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है। पीडि़त महिलाओं का कहना है कि उसने अपनी जमा-पूंजी किसी तरह एक छोटा सा पक्का घर बनाया था, लेकिन तीन माह पूर्व आपदा ने सब कुछ छीन लिया। अब न तो सिर पर छत है और न ही जीवनयापन का कोई साधन। मां-बेटी को उम्मीद थी कि प्रशासन मदद के लिए आगे आएगा, मगर महीनों बीत जाने के बाद भी न तो प्रशासन मौके पर पंहुचा है और ना ही सर्वे टीम पहुंची। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि हर बार आपदा के बाद सरकार राहत और पुनर्वास के दावे तो करती है लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं होता दिख रहा पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा विधवा मां-बेटी को तुरंत राहत राशि दी जाए और उनके लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की जाएए ताकि उन्हें सुरक्षित ठिकाना मिल सके। सैंज तहसील के तलाड़ा पंचायत क्षेत्र में आपदा की मार झेल चुकी एक विधवा मां और उसकी बेटी आज भी अपने उजड़े आशियाने की यादों में जीने को मजबूर हैं। भारी बारिश और भूस्खलन से उनका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। तब से लेकर अब तक मां.बेटी किराए के कमरे में रहकर किसी तरह गुजर.बसर कर रही हैं। पीड़ित विधवा महिला ने बताया कि आपदा के बाद प्रशासन ने मौका तक नही किया है । वता दे कि अब तक किसी तरह की राहत राशि या पुनर्वास की व्यवस्था प्रशासन ने नहीं की है । ऐसे में विधवा मां वेटी को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।
बाढ़ की भेंट चढ़ा रिहायशी मकान तलाड़ा पंचायत के उप प्रधान सुभाष ठाकुर ने कहा कि लाहुली देवी का रिहायशी मकान भारी बारिश के कारण 18 आगस्त 2025 को पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है और 24 आगस्त को पंचायत प्रतिनिधि घर का निरीक्षण करने मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मौके पर पाया गया कि विधवा लाहुली देवी का मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है और रहने लायक नहीं बचा है जिसकी रिपोर्ट पंचायत प्रतिनिधियों ने तुरंत राजस्व विभाग को भेज दी थी लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है जिसका पंचायत प्रतिनिधियों को खेद है।
