अंतरराष्ट्रीय

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने की मांग, पाकिस्तान और चीन ने खटखटाया UN का दरवाजा

डेस्क : पाकिस्तान और उसके सदाबहार दोस्त चीन ने मिलकर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) का दरवाज़ा खटखटाया है. दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें BLA और उसकी आत्मघाती शाखा ‘मजीद ब्रिगेड’ को आतंकी सूची में डालने की मांग की गई है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि अफगानिस्तान की धरती से कई आतंकी संगठन काम कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि वहां 60 से ज़्यादा आतंकी कैंप चल रहे हैं, जहाँ से पाकिस्तान पर हमले किए जाते हैं. इन संगठनों में उन्होंने BLA, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और ISIL-K जैसे समूहों का नाम लिया.

अहमद ने कहा, “पाकिस्तान और चीन ने मिलकर BLA और मजीद ब्रिगेड को 1267 प्रतिबंध समिति की सूची में डालने का अनुरोध किया है. हमें उम्मीद है कि परिषद इनकी आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए जल्द कार्रवाई करेगी.” उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान से फैलता आतंकवाद पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है.

इस मामले में चीन का साथ मिलना पाकिस्तान के लिए एक बड़ी बात है. चीन, सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों में से एक है, जिनके पास ‘वीटो पावर’ होती है. इसका मतलब है कि चीन किसी भी प्रस्ताव को रोक सकता है या पास कराने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. पाकिस्तान खुद भी 2025-26 के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय एक अलगाववादी समूह है, जो बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग करता है. यह संगठन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चीन के हितों को निशाना बनाता रहा है, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर.

‘मजीद ब्रिगेड’ इसी BLA का एक आत्मघाती दस्ता है, जिसे 2011 में बनाया गया था. यह दस्ता सबसे खतरनाक हमलों को अंजाम देने के लिए जाना जाता है.

यह दिलचस्प है कि अमेरिका पहले ही BLA और मजीद ब्रिगेड को एक विदेशी आतंकी संगठन का दर्जा दे चुका है. अमेरिका ने 2019 में BLA को ‘स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट’ (SDGT) घोषित किया था. BLA ने 2024 में कराची एयरपोर्ट और ग्वादर पोर्ट पर हुए हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी. इसके अलावा, 2025 में क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक करने का दावा भी इसी संगठन ने किया था, जिसमें 31 लोग मारे गए थे.

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