प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा को मनाया जाता है ‘संस्कृत दिवस’
06 से 12 अगस्त तक बिहार के सभी संस्कृत शिक्षण संस्थानों में आयोजित होगा ‘संस्कृत सप्ताह’ समारोह
12 अगस्त को पटना में होगा ‘संस्कृत सप्ताह’ समारोह का भव्य समापन
बोर्ड का अधिकृत वेबसाइट 12 को होगा लॉन्च
पटना : श्रावणी पूर्णिमा एक तरफ जहां भाई -बहनों का अटूट प्रेम का बंधन है रक्षाबंधन। वहीं संस्कृत- संस्कृति के संरक्षण के मद्देनजर श्रावणी पूर्णिमा को हम सभी संस्कृतानुरागी ‘ संस्कृत दिवस ‘ के रूप में मनाते हैं।
बोर्ड द्वारा बिहार के सभी संस्कृत विद्यालयों में संस्कृत दिवस मनाने का आदेश निर्गत किया गया है। जहां सम्भव है वहां सामाजिक प्रबुद्ध लोगों को आमंत्रण कर विशिष्ट व्याख्यान एवं छात्रों के बीच संस्कृत में शैक्षिक स्पर्धाओं का आयोजन कर संस्कृत सप्ताह समारोह का आयोजन करना चाहिए।
– संस्कृत सप्ताह समारोह आचरण करने की प्रमुख वैशिष्टता यह है कि –
– इससे भारतीय संस्कृति का संरक्षण होगा।
– संस्कृत भाषा के प्रति रुचि का विकास
– भाषिक कौशल का संवर्धन
– नैतिक मूल्यों का संवाहन
– रचनात्मकता और आत्मविश्वास की वृद्धि
– शिक्षक-छात्र समन्वय
– सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
– राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय भाषाओं का सम्मान
– योग, आयुर्वेद, ज्योतिष आदि से व्यावसायिक विषयों से परिचय
– समाज में जागरूकता का संदेश
