डेस्क: पंजाब के बठिंडा (Bathinda, Punjab) जिले के तलवंडी तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में बीमारी का डर अब सामाजिक रिश्तों पर भी असर डाल रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि इन गांवों में बेटे-बेटियों की शादी तय करने से पहले कैंसर और हेपेटाइटिस (Cancer and Hepatitis) की जांच रिपोर्ट देखी जाती है। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही रिश्ता पक्का करने की बात आगे बढ़ती है। बीमारी के कारण कई लोगों की शादियां नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दूसरे इलाकों के लोग इन गांवों में वैवाहिक रिश्ते जोड़ने से कतराते हैं, जिससे उन्हें सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तलवंडी तहसील के जज्वल गांव की स्थिति चिंताजनक है। गांव के निवासी स्वर्ण, हरमनदीप और वशाखा सिंह का कहना है कि गांव से करीब छह-सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित रिफाइनरी के कारण आसपास की हवा और पानी दूषित हो रहे हैं। उनका दावा है कि प्रदूषण के चलते लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कैंसर और हेपेटाइटिस के अलावा त्वचा संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
जज्वल गांव में कैंसर से सात लोगों की मौत का दावा
जज्वल के ग्राम प्रधान मलकीत सिंह के मुताबिक, तलवंडी तहसील के करीब 30 गांवों में बीमारियों का असर देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जज्वल गांव में वर्तमान में आठ लोग कैंसर से जूझ रहे हैं। पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान सात लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। गांव की आबादी करीब तीन हजार है।
मलकीत सिंह का कहना है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को इलाज के साथ आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। बीमारी के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं सामाजिक स्तर पर भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पतालों में पहुंच रहे गंभीर लक्षणों वाले मरीज
तलवंडी सब-डिवीजन अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जगरूप सिंह के मुताबिक, क्षेत्र में पेट में पानी भरने, आंखों में पीलापन और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
डॉ. जगरूप सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से इस क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। उनके अनुसार, बीमारियों से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के बीच मरीजों का बढ़ता दबाव चुनौती बना हुआ है।
मवेशियों की सेहत पर भी असर पड़ने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित हवा और पानी की समस्या केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं पर भी इसका असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, गाय और भैंसों के दूध देने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं पिछले कई वर्षों से सामने आ रही हैं।
ग्रामीण लंबे समय से रिफाइनरी को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। लोगों को आशंका है कि यदि प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, ग्रामीणों द्वारा कैंसर, हेपेटाइटिस और अन्य बीमारियों के लिए रिफाइनरी से होने वाले प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराने के दावों की पुष्टि के लिए पर्यावरणीय जांच, स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है। बीमारी के कारण विवाह संबंध प्रभावित होने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक है।


