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Karwa Chauth 2026: गर्भवती महिलाओं के मन में उठता है ये सवाल, पानी पी लिया तो क्या अधूरा रह जाएगा व्रत? जानें  व्रत, पूजा और सेहत से जुड़ी जरूरी सलाह

डेस्क: करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती है। साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। पारंपरिक  रूप से इस व्रत में सुबह से लेकर चांद न निकलने तक अन्न और जल का सेव नहीं किया जाता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह व्रत कई सवाल पैदा कर देता है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को सही मात्रा में पानी और पोषण की जरूरत होती है, ऐसे में क्या गर्भवती महिला एक घूंट पानी व्रत के दौरान पी सकती है। क्या पानी पीने से उसका व्रत तो नहीं टूट जाएगा। तो आइए जानते हैं कि इसके बारे में विस्तार से।

करवा चौथ पर पानी पीने से क्या व्रत टूट जाता है?
करवा चौथ का व्रत परंपरागत रूप से बिना पानी पिए रखा जाता है। यानी व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रोदय तक भोजन और पानी का सेवन नहीं करती हैं। हालांकि, व्रत से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों, क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में कुछ हद तक अलग हो सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से कुछ लोग निर्जला व्रत को ही पारंपरिक नियमों के अनुरूप मानते हैं। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत के नियमों में छूट को लेकर परिवार और धार्मिक जानकारों की सलाह ली जाती है। इसलिए केवल एक घूंट पानी पीने से व्रत टूटने के विषय में सभी परंपराओं के लिए एक जैसा निष्कर्ष देना सही नहीं होगा। अगर कोई गर्भवती महिला पानी पी लेती है, तो उसे अपराधबोध या तनाव लेने के बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है सावधानी बरतना?
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस समय पर्याप्त पानी और पोषक तत्वों का सेवन मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। लंबे समय तक बिना पानी के रहने से कुछ महिलाओं को कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द या शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर उन महिलाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, जिन्हें पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जिन्हें डॉक्टर ने नियमित अंतराल पर पानी और भोजन लेने की सलाह दी है। गर्भावस्था में निर्जला व्रत रखने का फैसला केवल धार्मिक परंपरा के आधार पर नहीं करना चाहिए। अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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