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मैं चाहती हूं कि ये सब दुनिया से चले जाएं… नाना पाटेकर को सपोर्ट करने वालों पर बरसीं तनुश्री दत्ता

डेस्क:  गोवा में 8 अक्टूबर की सुबह 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से एक्टर नाना पाटेकर का निधन हो गया। उनके निधन के बाद से ही  तनुश्री दत्ता चर्चा में बनी हई हैं, जिन्होंने  सालों पहले एक फिल्म सेट पर एक्टर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और नाना की मौत के बाद ‘ईविल डेड’ वाली टिप्पणी की थी। इसके लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा, और अब उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नई पोस्ट की है जिसमें कहा गया है कि यह खबर ‘मेरे जीवन में एक सकारात्मक बदलाव’ है।

वीडियो में तनुश्री महाकाल की मूर्ति के सामने प्रार्थना करती हुई दिखीं। कैप्शन में उन्होंने लिखा- “महाकाल बाबा के दरबार में मेरी आस्था! उन्होंने ही मेरी जान पर हुए कई हमलों से मुझे बचाया और नाना और उनके दोस्तों द्वारा की गई सैकड़ों ‘मारण क्रियाओं’ (जानलेवा तंत्र-मंत्र) से मेरी रक्षा की।” वह आगे कहती हैं- “कितना बड़ा इत्तेफ़ाक है कि मेरी जिंदगी में इतनी अच्छी बात होने के ठीक बाद मुझे महाकाल के दर्शन करने का मौका मिला। हालांकि, मुझे मौत की खबर की सच्चाई पर सच में शक है। मैं सच में चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि यह बुराई हमेशा के लिए खत्म हो जाए और मेरी ज़िंदगी की सभी बुराइयां एक-एक करके खत्म हो जाए।

तनुश्री  ने कहा- “अगर तुम मुझसे प्यार करते हो, तो तुम उन सभी बुरी ताकतों को खत्म कर दोगे जिन्होंने मुझे परेशान करने का फ़ैसला किया है और जो तब तक नहीं रुकेंगी जब तक वे मर नहीं जातीं। उन सभी को जिनमें उनके उड़ने वाले बंदर, मददगार और समर्थक भी शामिल हैं, जिनकी शह पर इन बुरी ताकतों ने मुझे लगातार परेशान किया है। अगर ये लोग ज़िंदा रहे, तो मैं दुनिया में अपना मकसद पूरा नहीं कर पाऊंगी और यहां से चली जाऊंगी। मैं चाहती हूं कि ये सब चले जाएं और उनके मरने की पूरी पुष्टि हो जाए। मैं उनकी बहुत ज़्यादा नेगेटिविटी और लगातार हो रही साज़िशों को और नहीं सह सकती।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी सवारी आ रही है और जब तक यह इच्छा पूरी नहीं होती, मैं धरती पर नहीं रुकूंगी। बाबा, धरती पर या तो वे रहेंगे या मैं। असल में अंतरिक्ष में मैं आपसे बेहतर जुड़ सकती हूं। धरती को ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत दी जाती है और यहां जीने की कोई ठोस वजह मेरे पास नहीं है। हर-हर महादेव! महादेव, मैं चाहती हूं कि आप दुनिया को साबित करें कि आप मुझसे कितना प्यार करते हैं! सदियों से मैं आपकी भक्त रही हूं। अब मैं अपने जन्मसिद्ध अधिकार से आपसे यह मांग कर रही हूँ। वे मुझे नहीं पहचानते, लेकिन आप पहचानते हैं, इसलिए कृपया मेरी विनम्र विनती स्वीकार करें।”

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