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आपके पेट के लिए खतरनाक है Cold Drinks , रोज पीने से बन सकते हो कैंसर के मरीज

डेस्क: चीनी वाले ड्रिंक्स, जैसे कि आम सॉफ्ट ड्रिंक्स, चीनी वाली चाय और कॉफी, स्पोर्ट्स और एनर्जी ड्रिंक्स, और फ्रूट ड्रिंक्स, बहुत से लोगों की डाइट का आम हिस्सा हैं। एक नई बड़ी स्टडी से पता चलता है कि जो लोग रोज़ाना मीठे ड्रिंक्स पीते हैं, उनमें पेट के कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में ज़्यादा होता है जो महीने में एक बार से भी कम ये ड्रिंक्स पीते हैं। खासकर, फ्रुक्टोज़ (एक तरह की चीनी जो आमतौर पर इन ड्रिंक्स में पाई जाती है) का ज़्यादा सेवन पेट के कैंसर के ज़्यादा मामलों से जुड़ा पाया गया।

चीनी वाले ड्रिंक्स का नुकसान
सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के पुराने डेटा से पता चलता है कि अमेरिका में लगभग 65% वयस्क हर दिन एक या उससे ज़्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स पीने की बात कहते हैं। इन ड्रिंक्स को रेगुलर पीने से सेहत पर कई बुरे असर पड़ सकते हैं, जैसे वज़न बढ़ना, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज़ और दिल की बीमारी। चीनी वाले ड्रिंक्स ज़्यादा पीने और कैंसर के बीच संभावित संबंध में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। अब, एक बड़े ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी से पता चलता है कि जो लोग नियमित रूप से चीनी-युक्त ड्रिंक्स पीते हैं, उनमें पेट का कैंसर होने का खतरा 2.45 गुना ज़्यादा हो सकता है।

<span;>रोज़ाना ड्रिंक्स पीने वालों को है ज्यादा खतरा
स्टडी में पाया गया कि  जो लोग महीने में एक से कम बार चीनी-युक्त ड्रिंक पीते थे, उनकी तुलना में रोज़ाना ये ड्रिंक्स पीने वालों में गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा दोगुने से भी ज़्यादा पाया गया। रिसर्चर्स ने कई संभावित रिस्क फैक्टर्स को ध्यान में रखकर यह नतीजा निकाला। यह संबंध उन महिलाओं में खास तौर पर मज़बूत पाया गया जो रोज़ाना एक से ज़्यादा चीनी-युक्त ड्रिंक पीती थीं। स्टडी में यह भी पाया गया कि फ्रुक्टोज़ (fructose) का ज़्यादा सेवन गैस्ट्रिक कैंसर के ज़्यादा मामलों से जुड़ा था। एक संभावना यह है कि मीठे ड्रिंक्स का बार-बार सेवन वज़न बढ़ने और मेटाबोलिक बदलावों में योगदान दे सकता है। पिछली रिसर्च में शरीर का ज़्यादा वज़न और कई तरह के कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध बताया गया है। हालांकि, मोटापे और कैंसर के अलग-अलग प्रकारों के बीच संबंध जटिल हो सकता है।

क्या फ्रुक्टोज कोई भूमिका निभा सकता है?
रिसर्चर ज़्यादा फ्रुक्टोज़ के सेवन और गैस्ट्रिक कैंसर के मामलों के बीच संबंध भी बताते हैं। सबूत बताते हैं कि हाई-फ्रुक्टोज़ कॉर्न सिरप क्रोनिक इन्फ्लेमेशन और ट्यूमर के विकास में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, स्टडी के नतीजे यह साबित नहीं करते कि फ्रुक्टोज़ ही पेट के कैंसर का कारण बनता है। डेटा बताते हैं कि खास तौर पर फ्रुक्टोज़ कैंसर के विकास में एक विशिष्ट भूमिका निभा सकता है। यह इंसुलिन या इन्फ्लेमेटरी रास्तों के कारण हो सकता है, लेकिन कैंसर से जुड़े कुछ खास मेटाबोलिक रास्तों के कारण भी हो सकता है। जीवनशैली से जुड़े कुछ कारक, जैसे खान-पान की आदतें, धूम्रपान और शराब का सेवन, संभवतः भूमिका निभाते हैं और ऑब्ज़र्वेशनल रिसर्च में इन कारकों को ध्यान में रखना मुश्किल होता है।

<span;>जो लोग मीठे ड्रिंक्स पीते हैं, उनके लिए इसका क्या मतलब है?

स्टडी में पेट के कैंसर का खतरा 2.45 गुना ज़्यादा पाया गया, जो सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जो लोग कभी-कभी सोडा पीते हैं, उन्हें पेट का कैंसर हो ही जाएगा। हालांकि स्टडी में पेट के कैंसर का खतरा दोगुने से भी ज़्यादा पाया गया, लेकिन यह ‘रिलेटिव रिस्क’ (सापेक्ष जोखिम) का पैमाना है। जिन लोगों ने नियमित रूप से चीनी वाले ड्रिंक्स का सेवन किया, उनमें पेट के कैंसर का रिलेटिव रिस्क लगभग 145% ज़्यादा था। ये नतीजे इस बात के सबूत को और मज़बूत करते हैं कि चीनी वाले ड्रिंक्स का बार-बार सेवन करने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है, जैसे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज़, दिल की बीमारी और कुछ तरह के कैंसर।

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