डेस्क: संगम नगरी में दुर्गा पूजा की तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बार संगम की मिट्टी से तैयार की जा रही इको फ्रेंडली दुर्गा प्रतिमाएं खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। महंगाई के दौर में जहां पूजा सामग्री से लेकर रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े हैं, वहीं मूर्तिकारों ने भक्तों को राहत देने का फैसला किया है। मूर्तिकारों ने इस बार दुर्गा प्रतिमाओं के दाम नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी कम होगा।
प्रतिमाओं को आकर्षक और आधुनिक रूप देने में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट के छात्र भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। छात्र अपनी कला और कल्पनाशीलता के जरिए प्रतिमाओं में नए डिजाइन और स्वरूप तैयार कर रहे हैं। मां दुर्गा के चेहरे के भाव, रंगों की बारीकी और सजावट में छात्रों की कलात्मक प्रतिभा साफ नजर आ रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि संगम की मिट्टी से तैयार प्रतिमाएं पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हैं। विसर्जन के बाद इनका प्राकृतिक रूप से घुलना आसान होता है। इस बार प्रयागराज की दुर्गा प्रतिमाओं में संगम की मिट्टी, मूर्तिकारों का हुनर और फाइन आर्ट के छात्रों की कल्पनाशीलता एक साथ देखने को मिल रही है। यही संगम इन प्रतिमाओं को खास पहचान दे रहा है।


