डेस्क: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को उप्र के मुख्यमंत्री को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री अगर इतना ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं। अयोध्या में सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत के मौके पर पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को यह चुनौती दी।
यादव ने कहा, ”बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री अगर इतना ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं।” यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने कहा था कि 15 दिन के अंदर ‘दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा’, उनके लिए अयोध्या का मैदान खाली पड़ा है। उन्होंने 2027 की शुरुआत में उप्र में होने वाले विधानसभा चुनावों में सपा की जीत का दावा करते हुए कहा कि ”आने वाले समय में जब सपा की सरकार बनेगी तो अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा, ”चुनाव और लोकतंत्र का त्योहार आने ही वाला है, हालांकि तारीखें आने में समय है, लेकिन हमारे साथी जानते हैं कि जिस समय चुनाव होगा, हमारे-आपके सामने भी फैसला लेने की घड़ी आएगी।” उन्होंने कहा, ”हम लोग बचपन से रामायण और महाभारत सुनते रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से सुनता रहा हूं कि जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत और जो व्यथा हरे वही कथा है। आज का समय बंधनों से भरा है।” सपा प्रमुख ने कहा, ”हमारे लिए जो प्रभु श्रीराम हैं, वही हमारे लिए प्रभु श्रीकृष्ण हैं और जो प्रभु श्रीकृष्ण हैं, वही हमारे लिए प्रभु श्रीराम हैं। यह कथा कोई कहानी और मनोरंजन नहीं है, कथा तो मन और मनोबल बढ़ाती है।
यादव ने निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ दल पर तंज कसते हुए कहा कि ”शक्ति सदुपयोग के लिए होती है, शक्ति दुरुपयोग के लिए नहीं होती है। आज के निर्वाचन आयोग और सत्ताधीशों को श्रीकृष्ण भगवान से सीखना चाहिए कि राज छल से नहीं प्रेम और जनमत से मिलता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा की अनंत सीखों में से एक विशेष सीख यह मिलती है कि प्रेम, दया और अपनापन (पीडीए) सबसे बड़ा मानव धर्म है। अगर धरती पर कोई सबसे बड़ा मानव धर्म माना जाएगा, तो वह प्रेम, दया, अपनापन का धर्म है। यादव ने कहा कि याद रखिए श्रीकृष्ण ने सिखाया कि प्रेम स्रे बड़ा कोई राजधर्म नहीं,जो प्रेम, दया, अपनापन नहीं रखता, उसका अंत कंस की तरह होता है। यादव ने कहा, ”आज तय करना है कि हमें नफरत बढ़ाने वाला शासन चाहिए या भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम वाला बंधुत्व चाहिए।


