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क्या किसी बीमारी के कारण नींद में बोलते हैं लोग? सांइस से समझिए पूरी बात

डेस्क:  हम सोते समय बोलते क्यों हैं? हर कोई सोता है लेकिन नींद को लेकर बहुत कम लोग इसकी बारीकियों को समझते हैं। नींद मनोवैज्ञानिक के तौर पर काम करने वाले विशेषज्ञ  के मुताबिक कई बार लोग अपने उस भाई-बहन के बारे में बताते हैं, जिसके साथ वे कमरा साझा करते हैं और जो पूरी रात नींद में बड़बड़ाता रहता है। कुछ लोग खुद भी दोस्तों के साथ रात बिताने के दौरान सोते-सोते पूरी, लेकिन एकतरफा बातचीत करने के बाद मजाक का पात्र बन चुके होते हैं। यह ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें नींद के दौरान शरीर कुछ गतिविधियां करता है या दिमाग कुछ अनुभवों से गुजरता है। इनमें बुरे सपने, नींद में चलना और नींद में बोलना शामिल हैं।

 कई चरणों से गुजरती है नींद
इनमें से ज्यादातर आम और पूरी तरह हानिरहित होते हैं। इन्हें तभी विकार माना जाता है, जब ये इतनी बार हों कि व्यक्ति के लिए वास्तविक समस्या पैदा करने लगें। नींद एक ही अवस्था नहीं है। हर रात व्यक्ति नींद के कई चरणों से गुजरता है। करीब एक चौथाई नींद ‘आरईएम’ यानी ‘रैपिड आई मूवमेंट’ (आंखों की तेज गति) चरण में होती है। इसी दौरान ज्यादातर सपने, खासकर जीवंत सपने आते हैं। ‘नॉन-आरईएम’ नींद, जिसमें गहरी नींद की अवस्थाएं भी शामिल हैं, रात की कुल नींद का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा होती है। इस दौरान शरीर की गतिविधियां काफी धीमी हो जाती हैं, जिससे उसे आराम करने और खुद की मरम्मत करने का अवसर मिलता है। डॉक्टर इन सभी चरणों को मिलाकर ‘स्लीप आर्किटेक्चर’ कहते हैं। ये चरण रात में लगभग हर 90 मिनट में चक्र के रूप में दोहराते हैं। सोने के तुरंत बाद नॉन-आरईएम नींद अधिक होती है, जबकि सुबह के शुरुआती घंटों में आरईएम नींद का हिस्सा बढ़ जाता है।

किन लोगों को लेनी चाहिए कितनी नींद ?
शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद याददाश्त को मजबूत करने, बच्चों के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किशोरों को हर रात आठ से 10 घंटे सोने की सलाह दी जाती है। तीन से पांच साल के बच्चों के लिए 10 से 13 घंटे और छह से 12 साल के बच्चों के लिए नौ से 12 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। सोते हुए व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह बंद नहीं होता। रात के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से सक्रिय रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद में बोलना तब होता है जब भाषा और बोलने के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के हिस्से सक्रिय रहते हैं, जबकि मुंह को बोलने से रोकने वाले हिस्से नींद में होते हैं। अधिकतर मामलों में नींद में बोलना स्पष्ट शब्दों में नहीं होता। व्यक्ति बड़बड़ा सकता है, हंस सकता है या फुसफुसा सकता है। यदि कोई शब्द बोला जाता है तो ‘नहीं’ सबसे आम शब्द है, जो नींद में बोले गए कुल शब्दों का करीब पांच प्रतिशत होता है। नींद में बोलने वाले लोग अक्सर सवाल पूछते हैं और कभी-कभी अपशब्द भी बोल सकते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि वे किसी से बहस कर रहे हैं।

क्या ये है चिंता की बात?
कुछ मामलों में नींद में बोलने वाला व्यक्ति ऐसे बोलता है मानो वह किसी के साथ वास्तविक बातचीत कर रहा हो और दूसरे व्यक्ति के जवाब देने के लिए रुक भी रहा हो। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उसके सपने में चल रही बातचीत का एक हिस्सा हो सकता है। नींद पर शोध करने वाली प्रयोगशालाओं में किए गए अध्ययनों के अनुसार, आरईएम नींद के दौरान व्यक्ति जो बोलता है, वह करीब 80 प्रतिशत मामलों में उसी समय देखे जा रहे उसके सपने से मेल खाता है।  कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि नींद में बोलने वाले लोगों की रात की नींद गैर-नींद में बोलने वालों की तुलना में डेढ़ घंटे से अधिक कम हो सकती है और उन्हें करीब आधी आरईएम नींद मिलती है। नींद में बोलना काफी आम है और दो-तिहाई से अधिक लोग जीवन में कभी न कभी ऐसा करते हैं। यह आम तौर पर चिंता का विषय नहीं है, हालांकि इससे नींद में चलने जैसी अन्य पैरासोमनिया की संभावना बढ़ सकती है। बच्चों में नींद में बोलना अधिक आम है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में ‘स्लो-वेव नॉन-आरईएम’ नींद अधिक होती है। उम्र बढ़ने के साथ इस तरह की गहरी नींद का अनुपात कम होता जाता है और संभव है कि इसी कारण नींद में बोलने की घटनाएं भी घटती जाएं। कुल मिलाकर, नींद में बोलना सामान्य माना जाता है।

इन बातों का रखें ख्याल

नींद में चलना, रात में डर जाना या बिस्तर गीला करना जैसी अन्य पैरासोमनिया भी उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाती हैं। यदि ये समस्याएं परेशान करने लगें तो ‘स्लीप साइकोलॉजिस्ट’ (नींद से जुड़ी समस्याओं पर काम करने वाले मनोवैज्ञानिक) से उपचार लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक थकान होने पर नींद में बोलने और अन्य पैरासोमनिया की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसलिए अगली बार यदि आप नींद में बोलें तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह शायद इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको पर्याप्त आराम और कुछ अतिरिक्त नींद की जरूरत है।

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