डेस्क: जब भी दिल की बीमारी का ज़िक्र होता है, तो अक्सर हमारे दिमाग में सीने का तेज़ दर्द, अचानक सांस फूलना या चक्कर आकर गिर पड़ने जैसी गंभीर तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट का मानना है कि दिल से जुड़ी हर बीमारी इतने साफ़ और स्पष्ट लक्षणों के साथ नहीं आती। कई बार दिल की बीमारियों के शुरुआती संकेत इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें महज़ रोज़मर्रा की थकान, तनाव या गैस की समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
29 सितंबर को मनाए जाने वाले World Heart Day 2026 के मौके पर डॉक्टरों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दिल की सेहत का ख्याल रखने के लिए किसी बड़े हार्ट अटैक या मेडिकल इमरजेंसी का इंतज़ार न करें।
1. इन रोज़मर्रा के लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी
थकान, सांस फूलना या सीने में दर्द का मतलब हमेशा दिल की समस्या नहीं होता। फिर भी, अगर ये लक्षण लगातार हों, बिना किसी साफ़ वजह के हों, बार-बार हों या कोई काम करते समय हों, तो हेल्थ एक्सपर्ट से इनकी ठीक से जांच करवानी चाहिए। ज़रूरी बात यह है कि लक्षणों को समझना आना चाहिए, न कि उनके आधार पर खुद ही बीमारी का अंदाज़ा लगाना चाहिए। लक्षणों की जांच हेल्थ एक्सपर्ट से करवानी चाहिए, जिसमें दूसरे जोखिमों का भी ध्यान रखा जाए।
2. बिना लक्षण के नुकसान पहुंचाने वाले ‘साइलेंट रिस्क’
कुछ चीज़ें दिल पर असर डालती हैं लेकिन ज़रूरी नहीं कि उनके कोई लक्षण दिखें। उदाहरण के लिए, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज़ बिना किसी लक्षण के हो सकते हैं, लेकिन इनसे दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
कुछ अन्य चीज़ें जो दिल की बीमारी के जोखिम पर असर डाल सकती हैं, उनमें फ़ैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, मोटापा, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, खराब खान-पान और तनाव शामिल हैं। यही वजह है कि दिल की चिंता करने के लिए लक्षणों का इंतज़ार करना हमेशा सही नहीं होता।
सिर्फ़ बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रहा हार्ट अटैक
एक समय था जब दिल की बीमारियों को केवल बढ़ती उम्र या बुज़ुर्गों की समस्या माना जाता था। लेकिन आज के समय में युवा और अधेड़ उम्र के लोग भी तेज़ी से इसका शिकार हो रहे हैं।
-युवाओं में बढ़ते जोखिम के मुख्य कारण:
देर तक काम करना और नींद की कमी
शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) का बिल्कुल न होना
अनहेल्दी खान-पान और जंक फ़ूड का सेवन
मोटापा और मेटाबोलिक असंतुलन
अत्यधिक स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन l
महिलाओं में दिख सकते हैं अलग संकेत
हार्ट अटैक या दिल की बीमारी के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग हो सकते हैं। महिलाओं में सीने में तेज़ दर्द के बजाय ये लक्षण ज़्यादा देखे जाते हैं:
अत्यधिक और अकारण थकान महसूस होना
जी मिचलाना या उल्टी जैसी संभावना बनना
चक्कर आना या हल्का सिर घूमना
पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट के ऊपरी हिस्से में बेचैनी होना… यदि ये लक्षण नए हैं और बार-बार हो रहे हैं, तो इन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
इमरजेंसी से पहले बचाव
कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि हमारा मकसद लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। नियमित हेल्थ चेकअप के ज़रिये दिल की गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। हेल्थ स्क्रीनिंग टेस्ट से ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल लेवल में होने वाले बदलावों का पता गंभीर दिल की बीमारियों के होने से पहले ही लगाया जा सकता है। किसी व्यक्ति को किस तरह के टेस्ट की और कितनी बार ज़रूरत है, यह उसकी उम्र, पिछली मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और जोखिमों पर निर्भर करता है। बचाव के उपाय सिर्फ़ क्लिनिक में ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी करने चाहिए। नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें, संतुलित भोजन करें, स्मोकिंग से बचें, शरीर का वज़न सही रखें और हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज़ जैसी स्थितियों को कंट्रोल में रखें।


