डेस्क: रूस में संसदीय चुनाव चल रहा है, इसी बीच यूक्रेनी सेना ने रात भर में रूस पर 1600 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं. इनमें से ज्यादातर ड्रोन के हमले राजधानी मॉस्को पर किए गए हैं. यूक्रेन की तरफ से रूस के ऐसे समय पर टार्गेट किया गया, जब क्रेमलिन में संसदीय चुनाव का तीसरा और आखिरी दिन था. मॉस्को के मेयर ने ड्रोन के इस हमले को रूसी राजधानी पर “अब तक का सबसे बड़ा” हमला बताया. उन्होंने कहा, “इससे मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी और एक रेजिडेंशियल बिल्डिंग को भी नुकसान हुआ है.”
स्थानीय गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव के मुताबिक, मॉस्को के आस-पास के इलाके में इन हमलों को अंजाम दिया. यहां फिलहाल दो लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए. मरने वाले दो लोगों में एक 74 साल का पुरुष और एक 44 साल की महिला शामिल है. फिलहाल, इस हमले को लेकर इस हमले पर यूक्रेन की ओर से कोई तुरंत बयान सामने नहीं आया है.
रूस में हुए हालिया संसदीय चुनाव पूरी तरह से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनकी सरकार (क्रेमलिन) के नियंत्रण में रहे, जिसमें उनकी नीतियों का विरोध करने वाला कोई नहीं था. चूंकि ये चुनाव यूक्रेन युद्ध के बीच हुआ था, इसलिए इसे देश का पहला ‘युद्धकालीन चुनाव’ कहा गया है.
चार साल से भी ज्यादा समय पहले रूस के हमले के बाद से, यूक्रेन मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी में दुनिया का लीडर बन गया है. वह रूस के अंदर तक हमले करने के लिए मिसाइलों के साथ-साथ अपने देश में बने लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. उसकी ड्रोन टेक्नोलॉजी ने दुनिया भर की सरकारों और डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स को प्रभावित किया है.
कीव का मकसद रूसी जनता को युद्ध के नतीजों का एहसास कराना और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर शांति समझौता करने के लिए दबाव डालना है. पुतिन ने अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वे हमला रोकना चाहते हैं.
पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में जमीन पर सीधी लड़ाई अब धीमी पड़ गई है. इसका मुख्य कारण यह है कि युद्ध के मैदान में बड़ी संख्या में ड्रोन और जमीनी रोबोट तैनात हैं. ये सैनिकों की किसी भी हलचल को तुरंत देख लेते हैं और उन पर हमला कर देते हैं. इस वजह से आमने-सामने की जंग कम हो रही है. अब इसकी जगह मॉस्को और कीव एक-दूसरे पर दूर से किए जाने वाले हवाई और मिसाइल हमलों को बढ़ा रहे हैं.


