डेस्क: मुंबई पुलिस की पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस ने ‘ओटीपी फार्मिंग’ (OTP farming) के जरिए विदेशी साइबर ठगों को भारतीय व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह (International gang) का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 669 सक्रिय सिम कार्ड, 100 मोबाइल फोन समेत साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया गया है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान प्रमोद कुमार उर्फ बिपिन, धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक गिरोह के तार कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े थे। ये विदेशी ठग भारतीय नागरिकों को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाते थे।
22.30 लाख रुपये की ठगी से खुला मामला
पुलिस के अनुसार एक व्यक्ति से 22.30 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी की जांच के दौरान इस नेटवर्क का पता चला। आरोपितों ने खुद को एक प्रतिष्ठित निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित से व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया था। इसके बाद अधिक रिटर्न का लालच देकर उसे निवेश के लिए तैयार किया गया।
जांच में पुलिस को पता चला कि इस ठगी में इस्तेमाल किए गए व्हाट्सएप नंबरों के पीछे भारतीय सिम कार्ड की एक पूरी सप्लाई चेन काम कर रही थी।
लोगों की जानकारी के बिना सक्रिय करते थे सिम
पुलिस अधिकारी के मुताबिक गिरोह में शामिल राजीव गुप्ता पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंट था। आरोप है कि वह लोगों की जानकारी के बिना उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड सक्रिय करता था।
इसके बाद ये सिम कार्ड धर्मेंद्र गुप्ता के माध्यम से कमीशन लेकर प्रमोद कुमार तक पहुंचाए जाते थे। इस तरह भारतीय मोबाइल नंबरों की व्यवस्था की जाती थी, जिनका आगे विदेशी साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था।
कीपैड फोन में सिम लगाकर चलाते थे OTP फार्मिंग
पुलिस के अनुसार प्रमोद कुमार इन सिम कार्ड को साधारण कीपैड मोबाइल फोन में लगाकर ‘ओटीपी फार्मिंग’ करता था। भारतीय व्हाट्सएप खातों के सत्यापन के लिए आने वाले ओटीपी को कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था।
इसके बदले प्रति ओटीपी 13 अमेरिकी डॉलर के बराबर क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। विदेशी साइबर अपराधी इन भारतीय व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल संभावित पीड़ितों से संपर्क करने और उन्हें ठगी के जाल में फंसाने के लिए करते थे।
किराये के बैंक खातों में पहुंचता था ठगी का पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से हासिल रकम को ऐसे बैंक खातों में भेजा जाता था, जिन्हें कथित तौर पर किराये पर लिया गया था। इन खातों का इस्तेमाल पैसे की आवाजाही के लिए किया जाता था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेश में बैठे साइबर अपराधियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही, ऐसे अन्य लोगों का पता लगाया जा रहा है, जो इस गिरोह की गतिविधियों का शिकार हुए हो सकते हैं।
91 कीपैड फोन समेत बड़ी बरामदगी
मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर पुलिस ने आरोपितों के पास से 91 कीपैड मोबाइल फोन, नौ स्मार्टफोन और 669 सक्रिय सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा एक सीपीयू, वाई-फाई राउटर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।
पुलिस का कहना है कि बरामद उपकरणों और सिम कार्ड की जांच के आधार पर गिरोह के नेटवर्क, लेनदेन और संभावित पीड़ितों के बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है।


