बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था एवं जागरूकता से समाज के पुनर्निर्माण में बाधक तत्त्वों को दूर कर समाज का पुनर्निर्माण करना संभव- प्रो मुनेश्वर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय,
दरभंगा:के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के तत्वावधान में “आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन” विषय बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से समस्तीपुर जिला के 200 एनएसएस स्वयंसेवकों का ‘सात दिवसीय आवासीय युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण शिविर’तीसरे दिन जुबिली हॉल में जारी रहा। शिविर का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस के लक्ष्य-गीत से हुआ। एसडीआरएफ सदस्य राजू कुमार ने बताया कि मानव शरीर की त्वचा के तापमान एवं उसके रंग से पता किया जा सकता है कि व्यक्ति मृत है या जीवित। मानव शरीर के वाइटल साइनस वह पैमाना है जो बतलाता है कि हमारे अंदरूनी अंग सही से काम कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि स्वस्थ वयस्कों का श्वसन दर 12 से 20 प्रति मिनट, ब्लड प्रेशर 120/80, पल्स रेट 60 से 80 प्रति मिनट, तथा शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है।
मालिक कुमार ने हर्ट अटेक का कारण पारिवारिक इतिहास, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एवं उम्र आदि पर निर्भर करता है। धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मानसिक तनाव, अत्यधिक मोटापा एवं मधुमेह, पल्स रेट बढ़ना, धमनी में फैट जमना आदि आदि कारण हैं। कहा कि जब हार्ट पंप करना बंद कर दे, जिससे महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन युक्त रक्त मिलना बंद हो जाता है और ब्रेन सेल करने लगता है, जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, उसे कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। क्लीनिक डेथ में व्यक्ति 4 से 5 मिनट तक ही जीवित रह पाता है। प्रशिक्षक रूपेश कुमार पासवान तथा खोखो कुमार ने आपातकाल की स्थिति में स्टेचर, रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार आदि की विस्तार से जानकारी दी तथा प्रायोगिक माध्यम से व्यावहारिक जानकारी दी।
बौद्धिक सत्र में विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो मुनेश्वर यादव ने “भारतीय समाज का पुनर्निर्माण : युवाओं का दायित्व” विषय पर बोलते हुए कहा कि यदि हम अधिकारों की तुलना में दायित्वों निर्वहन पर ध्यान दें तो समाज का पुनर्निर्माण तीव्र गति से होगा। हमारी अच्छी सोच एवं बेहतरीन कार्यों से समाज में परिवर्तन होता है। जाति, वर्ग, लिंग, धर्म आदि पुनर्निर्माण में बाधक तत्त्व हैं, जिन्हें तोड़कर ही युवा राष्ट्र निर्माण में तेजी ला सकते हैं। बेहतरीन शिक्षा-व्यवस्था एवं जागरूकता से इन विभेदक तत्वों को मिटाया जा सकता है और समाज का पूनर्निर्माण किया जा सकता है। शिविर में प्रशिक्षकों, प्रशिक्षुओं, अतिथियों, आयोजकों आदि का स्वागत शिविर संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक-02 डॉ शबनम कुमारी ने किया।

